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Sweden और USA के बीच रक्षा समझौता: नाटो में शामिल होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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नाटो में शामिल होने की दिशा में बढ़ते हुए स्वीडन ने अमेरिका के साथ एक बहुत महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग समझौता किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका को स्वीडन के सभी सैन्य अड्डों तक पहुंच प्राप्त हो जाएगी और इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।

स्वीडिश रक्षा मंत्री पॉल जॉनसन ने वाशिंगटन में इस समझौते पर हस्ताक्षर किया। इसके बाद उनका कहना है कि इस समझौते से स्वीडन को युद्ध या संकट के समय अमेरिका से सहायता प्राप्त करना आसान हो जायेगा।

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इस समझौते का एक अहम पहलू यह है कि यह कदम स्वीडन को नाटो की सदस्यता की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। नाटो जो कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के रूप में जाना जाता है।  यह एक सैन्य गठबंधन है जो अपने सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। स्वीडन का यह कदम न केवल उसे वैश्विक सुरक्षा मामलों में अधिक प्रभावशाली बनाता है, बल्कि उसके और अमेरिका के बीच सामरिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

स्वीडन और अमेरिका के इस समझौते से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा के मामलों में एक नई गतिशीलता का निर्माण हो सकता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नए आयाम प्रदान करेगा और साथ ही साथ यह यूरोप में स्थिरता और शांति के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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इस कदम से अगर कोई सबसे ज्यादा चिंतित है तो वो है रूस। स्वीडन और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से जटिल रहे हैं। खासकर शीत युद्ध के दौरान इन दोनों देशों का इतिहास युद्धों और राजनीतिक तनावों से भरा पड़ा है। हालांकि शीत युद्ध के अंत के बाद से स्वीडन और रूस के बीच संबंधों में कुछ सुधार हुआ है।

स्वीडन का नाटो में शामिल होने आसार रूस के लिए एक चिंताजनक विषय हो सकता है। रूस नाटो के विस्तार को अपने लिए एक सामरिक खतरे के रूप में देखता है, और स्वीडन का इस गठबंधन में शामिल होने की चर्चा भी इस चिंता को और बढ़ा सकता है।

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नाटो के विस्तार को रूसी सरकार अपनी सुरक्षा के लिए एक बढ़ते खतरे के रूप में देखती है। स्वीडन का नाटो में शामिल होना इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन को बदल सकता है, जिससे रूस को अपनी सैन्य और रक्षा नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है। और यह बदलाव विश्व शांति के लिए कही से भी ठीक नहीं है। 

यह स्थिति रूस के साथ स्वीडन के संबंधों में और तनाव उत्पन्न कर सकती है। स्वीडन और नाटो के बीच बढ़ते सहयोग से रूस को अपने पश्चिमी सीमा क्षेत्र में सामरिक संतुलन को लेकर चिंतित होना पड़ सकता है। यह स्थिति यूरोपीय सुरक्षा के परिदृश्य में एक नया मोड़ ला सकती है, जिससे तनाव और संघर्ष की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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इसलिए, स्वीडन का नाटो में शामिल होना न केवल उसके और अमेरिका के बीच के संबंधों पर प्रभाव डालेगा बल्कि यह रूस के साथ उसके संबंधों और समग्र रूप से यूरोपीय सुरक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।

“वयम् रक्षामहे।”  

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इसका अर्थ है: “हम सुरक्षा करते हैं।”

यह श्लोक स्वीडन और अमेरिका के इस समझौते की भावना को प्रतिबिंबित करता है। यह दर्शाता है कि दो देशों का मिलकर काम करना और सहयोग करना न सिर्फ उनकी अपनी सुरक्षा के लिए है, बल्कि यह विश्व स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को भी मजबूती प्रदान करता है।

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