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भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: कतर में फंसे नौसैनिक स्वदेश लौटे!

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कतर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत, जासूसी के आरोप में मौत की सजा से दंडित भारतीय नौसेना के पूर्व कर्मियों को रिहा किया गया है। इस मामले को भारतीय विदेश मंत्रालय ने बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। बयान में यह बताया गया कि नौसेना के सात पूर्व कर्मी कतर से सकुशल भारत लौट आए हैं। इस घटना की पृष्ठभूमि में, बीते साल दिसंबर में कतर की एक अदालत ने अल दाहरा ग्लोबल केस में आठ भारतीयों को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में जेल की सजा में परिवर्तित कर दिया गया।

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विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ने कतर में हिरासत में लिए गए इन नागरिकों की रिहाई का स्वागत किया है और इसे अपनी राजनयिक विजय के रूप में मनाया है। इनमें से सात भारतीयों की वापसी पर विशेष रूप से खुशी जताई गई है। इस सफलता के लिए भारतीय प्रधानमंत्री और कतर के अमीर के व्यक्तिगत हस्तक्षेप को धन्यवाद दिया गया है। इस रिहाई के पीछे लगातार प्रयासों और व्यक्तिगत रूप से उठाए गए कदमों को सराहा गया है।

इस प्रक्रिया में, कतर में हिरासत में लिए गए आठ भारतीयों में से कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन वीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरव वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर प्रणोद तिवारी, कमांडर सुगना का पका, कमांडर संजीव गुप्ता और सेलर रागेश्री का नाम शामिल है। इस मामले में भारत ने कतर के साथ द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती और इस विषय पर गहन चर्चा की थी, जिसके परिणामस्वरूप यह सफलता प्राप्त हुई। इस घटनाक्रम को भारतीय नौसेना के पूर्व कर्मियों की वापसी और भारत-कतर संबंधों में एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

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“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥”

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“सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों। सभी शुभ देखें, कोई भी दुःख का भागी न हो।” यह श्लोक इस लेख के संदर्भ में एकता, शांति और कल्याण की भावना को प्रकट करता है। कतर में नौसेना के पूर्व कर्मियों की रिहाई न केवल उनके परिवारों के लिए सुखद समाचार है बल्कि यह सभी के लिए एकता और सहयोग की एक मिसाल भी है। इस घटनाक्रम से यह संदेश मिलता है कि सामूहिक प्रयासों से किसी भी समस्या का समाधान संभव है और सभी को सुख और शांति की ओर ले जाया जा सकता है।

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