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उत्तराखंड ने बदल दी विवाह और विरासत की परिभाषा! जानिए कैसे?

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uttrakhand uniform civil code

इस लेख में हम उत्तराखंड में लागू हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड के महत्वपूर्ण परिवर्तनों का विश्लेषण करेंगे। भारत में विविधतापूर्ण संस्कृतियों और धर्मों के मद्देनजर विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग नियम और कानून होते हैं। यह विविधता जहां एक ओर भारतीय समाज की खूबसूरती को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर कई बार यह व्यावहारिक समस्याओं का कारण भी बनती है। इसी संदर्भ में, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की आवश्यकता और महत्व को समझा जा सकता है।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करना है। इससे विवाह, उत्तराधिकार, और अन्य नागरिक मामलों में समानता और न्याय को बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप, विवाह, उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिन्हें इस नए कोड के तहत विस्तार से नियमित किया गया है।

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लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए नए कानून के तहत कड़े प्रावधान किए गए हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी जोड़े की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो उन्हें अपने माता-पिता को इस बारे में सूचित करना होगा। इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप से उत्पन्न होने वाले बच्चे को वैध माना जाएगा जो समाज में उनके अधिकारों की रक्षा करेगा। यहां तक कि इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को घोषित न करने पर जेल और जुर्माने जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

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यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के पीछे का एक मुख्य उद्देश्य समाज में न्याय और समानता को बढ़ावा देना है। इससे हर व्यक्ति को चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय का हो, समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां प्रदान की जाएगी। इस कदम से धार्मिक और सामाजिक भेदभाव को कम करने में मदद मिलेगी और यह भारतीय समाज के लिए एक समान कानूनी ढांचे की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

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उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड का लागू होना न केवल उस राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक साहसिक कदम साबित हो रहा है। इससे समाज में एकता और सामंजस्य स्थापित होने की उम्मीद है, जिससे हर नागरिक को समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां मिलेंगी। इस कदम से धार्मिक और सामाजिक भेदभाव कम होगा, और एक समान कानूनी ढांचे की ओर एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

“धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः।”

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अर्थ – धर्म के बिना, मनुष्य पशुओं के समान होता है। यह श्लोक उत्तराखंड में लागू किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड के महत्व को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य समाज में धार्मिक और सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर समानता और न्याय स्थापित करना है। धर्म यहाँ समाज में एकता और सामंजस्य की नींव है, और इस श्लोक के माध्यम से, हम समझ सकते हैं कि कानून और धर्म का समाज में एक सुसंगत ढांचा होना चाहिए जो सभी के लिए समान हो।

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