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Samskrita Bharati: संस्कृत की वैश्विक पुनर्जागरण यात्रा की ओर बढ़ते कदम

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Samskrita Bharati Event

महाकाल की नगरी उज्जैन में संस्कृत भारती के द्वारा महानगर Samskrita सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसमें संस्कृत भाषा क्षेत्र से जुड़े कई विद्वान व्यक्तियों ने हिस्सा लिया और संस्कृत के प्रति अपने सम्मान को व्यक्त किया। उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए इस समारोह में कई रंगारंग कार्यक्रम हुए जिसमें कई प्रतिभावान बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। संस्कृत के प्रति उनकी रुचि और ज्ञान ने वहां उपस्थित सभी लोगों को बहुत प्रभावित किया।

यह आयोजन संस्कृत भारती के द्वारा किया गया था जो कि एक गैर-लाभकारी संगठन है, इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य Samskrita भाषा की रक्षा, विकास और प्रसार करना है। संस्कृत भारती ने संस्कृत भाषा, साहित्य, परंपरा और इसमें निहित ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों और परियोजनाओं की शुरुआत की है। इस संगठन में बहुत समर्पित और उत्साही स्वयंसेवकों की एक बड़ी टीम है जो समाज के सभी वर्गों तक संस्कृत भाषा का ज्ञान पहुंचाते हैं।

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संस्कृत भारती ने लगभग 10 मिलियन लोगों को संस्कृत बोलना सिखाया है और 1 लाख के करीब संस्कृत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। इसके अलावा, इसने दुनिया भर के 26 देशों में 4500 केंद्र स्थापित किए हैं। संस्कृत भारती विभिन्न पाठ्यक्रमों और शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत सीखने और बोलने की क्षमता को बढ़ावा देती है। इनमें ‘संभाषण शिबिर’, ‘पत्राचार पाठ्यक्रम’, ‘गीता शिक्षण केंद्रम’, और ‘सरल संस्कृत परीक्षा’ जैसे अनूठे कोर्स शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य व्यक्तियों को संस्कृत भाषा में दक्षता प्रदान करना और उन्हें इस भाषा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और ज्ञान की गहराई से परिचित कराना है।

संस्कृत भारती ने जमीनी स्तर पर संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कई अनूठी परियोजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं ने लाखों प्रशिक्षित भाषा विशेषज्ञों को तैयार किया है जो संस्कृत को बढ़ावा देने और संरक्षित करने में मदद करते हैं। संस्कृत भारती नियमित रूप से समाज के विभिन्न वर्गों के लिए कार्यक्रम आयोजित करती है और इसकी गतिविधियों और कार्यक्रमों के बारे में नियमित अपडेट प्रदान करती है।

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संस्कृत भारती का उद्देश्य संस्कृत भाषा को पुनर्जीवित करना और संस्कृति को पुनर्जागृत करना है। इसके माध्यम से, यह संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति की समृद्धि को विश्व स्तर पर पहुंचाने का प्रयास करता है। संस्कृत भारती का कार्य और दृष्टिकोण भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और उसे विश्व स्तर पर प्रचारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, संस्कृत भारती ने ‘संस्कृतसप्ताहप्रचाराभियानम्’, ‘महर्षी वाल्मीकी जयंती विश्वसम्मेलनम्’, ‘कश्मीर की विद्वत्परम्परा संगोष्ठी’ जैसे विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाने का कार्य किया है।

इस प्रकार, संस्कृत भारती न केवल भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि विश्व स्तर पर संस्कृत भाषा के महत्व और उसकी विशेषताओं को भी प्रदर्शित कर रही है। इसकी गतिविधियां और प्रयास संस्कृत भाषा के पुनर्जागरण में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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“विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम्।

पात्रत्वाद्धनमाप्नोति, धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥”

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हिंदी अर्थ: विद्या विनम्रता प्रदान करती है, विनम्रता से योग्यता आती है। योग्यता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और फिर सुख की प्राप्ति होती है।

यह श्लोक संस्कृत भारती के उद्देश्यों और गतिविधियों के साथ गहरा संबंध रखता है। संस्कृत भारती विद्या के प्रसार के माध्यम से समाज में विनम्रता, योग्यता, धर्म और अंततः सुख की खोज को बढ़ावा देती है। संस्कृत भाषा और साहित्य में निहित ज्ञान और जीवन मूल्य व्यक्तियों को न केवल भाषाई कौशल प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें एक विनम्र, योग्य और धार्मिक जीवन जीने की दिशा में भी मार्गदर्शन करते हैं।

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संस्कृत भारती के पाठ्यक्रम और शिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को विनय और पात्रता की ओर ले जाते हैं, जो उन्हें जीवन में सफलता और समृद्धि की ओर अग्रसर करते हैं। इस प्रकार, वे धर्म और अंततः सुख की प्राप्ति के मार्ग पर चलते हैं। इस श्लोक के माध्यम से, संस्कृत भारती का प्रयास समाज में विद्या के महत्व को उजागर करना और व्यक्तियों को एक सार्थक और संतुष्ट जीवन की ओर मार्गदर्शन करना है।

Samskrita भाषा भारतीय संस्कृति और ज्ञान की एक अमूल्य धरोहर है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और इसे ‘देववाणी’ भी कहा जाता है। संस्कृत भाषा ने वेद, उपनिषद, पुराण, महाकाव्य जैसे अनेक ग्रंथों को संजोया है, जो अपने आप में ज्ञान और दर्शन का भंडार हैं। इस भाषा की संरचना और व्याकरण इतने वैज्ञानिक हैं कि आज भी विद्वान इसकी गहराइयों का अध्ययन कर रहे हैं।

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विश्व प्रसिद्ध हस्तियों ने भी संस्कृत भाषा की महत्ता को स्वीकार किया है। महात्मा गांधी ने कहा था, “संस्कृत भाषा को जीवित रखना हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करने के समान है।” इसी तरह, प्रसिद्ध जर्मन विद्वान मैक्स मूलर ने कहा, “संस्कृत भाषा विश्व की सबसे पूर्ण और वैज्ञानिक भाषा है।” इन उद्धरणों से संस्कृत की वैश्विक महत्ता और इसके विशाल ज्ञान को समझा जा सकता है।

Samskrita भाषा न केवल भारतीय ज्ञान और दर्शन की वाहक है, बल्कि यह विश्व भर के विद्वानों और भाषाविदों के लिए भी एक अद्भुत अध्ययन क्षेत्र है। इसकी समृद्धि और गहराई ने इसे विश्व भर में एक विशेष स्थान दिलाया है। संस्कृत भाषा, जो ज्ञान और विद्या की अनंत धारा है, वह हमें अतीत से जोड़ती है और भविष्य की ओर मार्गदर्शन करती है। इसकी अमरता और समृद्धि हमें यह सिखाती है कि ज्ञान की खोज अनंत है और संस्कृत हमें उस अनंत की ओर ले जाने वाली एक दिव्य भाषा है।

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