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Atal Bihari Vajpayee: एक परमाणु शक्ति के निर्माता

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Atal Bihari Vajpayee
Atal Bihari Vajpayee जी से जुड़ी एक प्रसिद्ध घटना है जो उनकी वाकपटुता और दूरदर्शिता को दर्शाती है। यह घटना 1999 की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था। उस समय वाजपेयी जी ने शांति की एक बड़ी पहल की और दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा की शुरुआत की। इस बस सेवा का नाम ‘सदा-ए-सरहद’ रखा गया और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारना था। वाजपेयी जी खुद इस बस में सवार होकर लाहौर पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पाकिस्तानी नेताओं से मुलाकात की और शांति वार्ता की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने मिनार-ए-पाकिस्तान पर भी जाकर भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ती और शांति का संदेश दिया। उनकी इस पहल को विश्वभर में सराहना मिली और इसे दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की एक महत्वपूर्ण कोशिश माना गया।

हालांकि, इस शांति पहल के कुछ ही महीनों बाद कारगिल युद्ध हुआ, जिसने दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से तनावपूर्ण बना दिया। लेकिन वाजपेयी जी की इस शांति यात्रा और उनके द्वारा दिखाए गए साहस और दूरदर्शिता को आज भी याद किया जाता है। उनकी यह यात्रा उनके शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बेहतर संबंधों की दिशा में उठाए गए कदमों का प्रतीक है। यात्रा के दौरान एक महिला पत्रकार ने उनसे उनके अविवाहित रहने का कारण पूछा, जिस पर वाजपेयी जी ने हाजिर जवाबी से जवाब दिया कि वह आदर्श पत्नी की खोज में हैं, लेकिन जिसे वह आदर्श पाते हैं, वह भी आदर्श पति की तलाश में है। इसी तरह, पाकिस्तान से संबंध सुधारने के प्रयास में उन्होंने लाहौर बस यात्रा की थी। वहां एक पाकिस्तानी महिला पत्रकार ने उनसे शादी का प्रस्ताव दिया और कहा कि मुंह दिखाई में वह कश्मीर चाहती हैं। इस पर वाजपेयी जी ने चतुराई से जवाब दिया कि वह शादी के लिए तैयार हैं, लेकिन दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए। उनके ये जवाब न केवल मीडिया में चर्चित हुए बल्कि लोगों के दिलों में भी गहराई से उतर गए।

Atal Bihari Vajpayee  जी की वाकपटुता और उनके विचारों की गहराई ने उन्हें एक अद्वितीय नेता के रूप में स्थापित किया। उनके भाषण और उनकी कविताएँ आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं। उनकी जयंती पर, हम उनके जीवन के इन अनमोल किस्सों को याद करते हैं और उनके विचारों को आत्मसात करने का प्रयास करते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी, एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था, और उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती वर्ष विद्यार्थी जीवन में राजनीतिक चेतना और सामाजिक सरोकारों के बीच बिताए। उनकी राजनीतिक यात्रा भारतीय जनसंघ के साथ शुरू हुई, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का रूप ले चुकी थी।

वाजपेयी जी ने 1957 में पहली बार बलरामपुर से लोकसभा सदस्य के रूप में संसद में प्रवेश किया। उनकी वाकपटुता, गंभीर विचारशीलता और राजनीतिक दूरदर्शिता ने उन्हें जल्द ही एक प्रमुख राजनीतिक आवाज बना दिया। वे जनसंघ के प्रमुख नेताओं में से एक थे और बाद में जब जनसंघ भारतीय जनता पार्टी में विलीन हो गया, तो वाजपेयी जी इसके पहले अध्यक्ष बने। उनका पहला कार्यकाल 1996 में मात्र 13 दिनों का रहा, लेकिन उनकी दूसरी और तीसरी पारी, 1998 से 2004 तक, ने उन्हें भारतीय राजनीति के एक अद्वितीय नेता के रूप में स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने पोखरण-II परमाणु परीक्षण किया, जिसने भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया। उनके नेतृत्व में भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी नई दिशा देखने को मिली, जिसमें दिल्ली-लाहौर बस सेवा और आगरा शिखर सम्मेलन प्रमुख थे।

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वाजपेयी जी की विशेषता उनकी उदार और समावेशी राजनीतिक शैली थी। वे विपक्षी दलों के साथ भी संवाद और सहयोग की भावना रखते थे। उनकी विदेश नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत स्थान दिलाया। उनके कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने भी महत्वपूर्ण विकास देखा, और उन्होंने नई आर्थिक नीतियों को अपनाया। वाजपेयी जी की राजनीतिक विरासत केवल उनके निर्णयों और नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी कविताएं और भाषण भी उनके गहरे विचार और संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। उनकी कविताएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और उनके भाषण उनकी विशिष्ट शैली और गरिमा का प्रतीक हैं। 16 अगस्त 2018 को उनके निधन ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया, लेकिन उनकी विरासत और उनके द्वारा दिए गए योगदान आज भी भारतीय राजनीति और जनमानस में जीवंत हैं। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा।

Atal Bihari Vajpayee जी ने कई प्रेरणादायक कविताएं लिखी हैं। उनमें से एक प्रसिद्ध कविता यहाँ प्रस्तुत है: हार नहीं मानूंगा

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हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा
काल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।
बाधाएँ आती हैं आएँ,
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ
पाँवों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसे यदि ज्वालाएँ
निज हाथों में हस्ती लेकर,
आस्तीनों में साहस भरकर
प्रतिपल वर्दीशें बदलता
मैं अतीत को अमरता देता
काल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।

यह कविता उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और अटूट संकल्प को दर्शाती है। इसमें वे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की बात कहते हैं, और यह संदेश देते हैं कि कठिनाइयों के बावजूद, वे कभी हार नहीं मानेंगे और नया गीत गाते रहेंगे। यह कविता उनके जीवन दर्शन और उनके राजनीतिक करियर की झलक भी प्रदान करती है। अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन में सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाओं में से एक है 1998 में पोखरण में किया गया परमाणु परीक्षण। 11 और 13 मई 1998 को, भारत ने राजस्थान के पोखरण परीक्षण स्थल पर पांच परमाणु बमों का सफल परीक्षण किया, जिसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से जाना जाता है। इस घटना ने न केवल भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया, बल्कि विश्व मंच पर भारत की स्थिति को भी मजबूत किया।

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वाजपेयी जी के नेतृत्व में यह परीक्षण बहुत ही गोपनीयता के साथ किया गया था, और इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया। इस परीक्षण के बाद वाजपेयी जी ने घोषणा की कि भारत अब एक पूर्ण परमाणु शक्ति है और इसका उद्देश्य शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। इस परीक्षण के बाद भारत पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन वाजपेयी सरकार ने दृढ़ता से इनका सामना किया और भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी। यह परीक्षण न केवल भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का प्रतीक था, बल्कि यह वाजपेयी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण था। आज भी यह परीक्षण भारतीय इतिहास के सबसे गौरवशाली क्षणों में से एक के रूप में याद किया जाता है।
Atal Bihari Vajpayee के जीवन और उनके द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की चर्चा करते हुए, एक संस्कृत श्लोक उनके दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता को दर्शाता है:

“उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥”

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हिंदी अर्थ: कार्य प्रयत्न (उद्यम) से ही सिद्ध होते हैं, केवल मन की इच्छाओं से नहीं। सोये हुए शेर के मुख में हिरण स्वयं प्रवेश नहीं करते। इस श्लोक का संबंध अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और उनके द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण से यह है कि उन्होंने दिखाया कि महत्वपूर्ण उपलब्धियां केवल दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से ही संभव हैं। उन्होंने न केवल भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया, बल्कि विश्व मंच पर भारत की एक मजबूत और सम्मानित छवि भी बनाई। उनका जीवन और कार्य हमें यह सिखाते हैं कि सफलता के लिए निरंतर प्रयास और साहसिक निर्णय आवश्यक हैं। उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरणा देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ता और उद्यम से ही सफलता की नई राहें खुलती हैं।

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