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2024 लोकसभा चुनाव: भाजपा की रणनीति और क्षेत्रीय दलों से टक्कर

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BJP 2024

भारतीय राजनीति के परिदृश्य में 2024 के आगामी लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार किया है, जिसमें विपक्षी गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के साथ सीधे मुकाबले की योजना शामिल है। दिल्ली में हुई दो दिवसीय बैठक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने वोट प्रतिशत को 10% बढ़ाने की दिशा में जुटने का निर्देश दिया, जिससे पार्टी की सत्ता में वापसी सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के एक प्रत्याशी के फॉर्मूले से निपटने के लिए भाजपा ने उन राज्यों में भी मजबूत और सीधी लड़ाई का फैसला किया है जहां पार्टी कमजोर स्थिति में है, खासतौर पर दक्षिण भारतीय राज्यों में।

पार्टी ने मिशन 2024 के तहत राज्यों में स्थानीय छोटे दलों के साथ गठबंधन की गुंजाइश तलाशने की नीति अपनाई है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि लोकसभा में सीटों के लिहाज से भाजपा सीनियर पार्टनर की अपनी भूमिका से कोई समझौता नहीं करेगी। इसके अलावा, गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश अध्यक्षों और प्रभारियों को 2019 के मुकाबले 10 या ज्यादा वोट हासिल करने का लक्ष्य दिया, जिससे विपक्षी गठबंधन के खिलाफ एक मजबूत स्थिति बनाई जा सके। भाजपा की इस रणनीति का उद्देश्य न केवल अपने वोट बैंक को बढ़ाना है, बल्कि विपक्षी गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के साथ सीधे मुकाबले में उतरकर अपनी स्थिति को और मजबूत करना है। इस रणनीति के साथ, भाजपा ने अपने लिए एक बड़ी और दूरगामी जीत की नींव रखी है, जिससे वह भारतीय राजनीति में अपना दबदबा और मजबूत कर सके।

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भाजपा की इस रणनीति में दक्षिण भारतीय राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने की योजना भी शामिल है, जहां पार्टी ने पहले कम सफलता प्राप्त की है। इसके लिए, पार्टी ने स्थानीय दलों के साथ संभावित गठबंधनों की तलाश की है, साथ ही निर्दलीय और छोटे दलों के साथ समर्थन बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसके अलावा, पार्टी ने विभिन्न राज्यों में विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जैसे कि उत्तर प्रदेश में पिछली बार से 10 सीटें ज्यादा जीतने, पश्चिम बंगाल में 5, ओडिशा में 2, तेलंगाना में 4, तमिलनाडु में 16, केरल में 6, और आंध्र प्रदेश में 10 सीटें ज्यादा जीतने का लक्ष्य।

इस व्यापक और आक्रामक रणनीति के साथ, भाजपा ने न केवल अपने वोट बैंक को बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि विपक्षी गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के साथ सीधे मुकाबले में उतरकर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस रणनीति की सफलता न केवल भाजपा के लिए, बल्कि भारतीय राजनीति के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित होगी। इस प्रकार, 2024 के चुनाव न केवल भाजपा के लिए, बल्कि भारतीय राजनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होंगे, जहां रणनीति, नीतियां, और जनता की आकांक्षाएं नए भारत की दिशा तय करेंगी।

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना 1980 में हुई थी, जो भारतीय जनसंघ के विघटन के बाद उसकी विचारधारा और नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए बनी थी। जनसंघ की स्थापना 1951 में हुई थी, और यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों पर आधारित थी। शुरुआती दशकों में, BJP ने मुख्य रूप से ‘हिंदुत्व’ की विचारधारा को अपनाया और भारतीय राजनीति में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई। 1990 के दशक में, अयोध्या आंदोलन और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों के साथ, BJP ने अपनी पहचान मजबूत की और 1998 में पहली बार सत्ता में आई। वर्ष 2014 में, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की और भारतीय राजनीति में एक नया युग शुरू किया।

भारतीय राजनीति का भविष्य बहुत हद तक विविधता, युवा आबादी, और तकनीकी प्रगति पर निर्भर करेगा। आने वाले वर्षों में, राजनीतिक दलों को अधिक समावेशी, पारदर्शी और जवाबदेह होने की उम्मीद की जाएगी। युवा मतदाता और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका नीति निर्माण और चुनावी रणनीतियों को नई दिशा देंगे। विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे, जबकि डिजिटल इंडिया और स्थिरता जैसे नए आयाम भी महत्वपूर्ण होंगे। भारतीय राजनीति निश्चित रूप से एक गतिशील और उत्तरोत्तर विकसित होती प्रक्रिया है, जिसमें नागरिकों की भागीदारी और उनकी आकांक्षाएं निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

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संघे शक्ति कलियुगे।

Hindi Meaning: कलियुग में संघ (समूह) में ही शक्ति है।

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Relation with the Article: यह श्लोक भाजपा की 2024 के चुनावों के लिए रणनीति से संबंधित है। जैसा कि लेख में वर्णित है, भाजपा ने विपक्षी गठबंधन और क्षेत्रीय दलों के साथ सीधे मुकाबले के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है। इस श्लोक का अर्थ है कि कलियुग में, यानी वर्तमान समय में, एकता और समूह में ही वास्तविक शक्ति निहित है। भाजपा की रणनीति, जो कि विभिन्न राज्यों में स्थानीय दलों के साथ संभावित गठबंधन और विपक्षी गठबंधन के खिलाफ एक मजबूत स्थिति बनाने पर केंद्रित है, इस श्लोक के संदेश को प्रतिबिंबित करती है। यह दर्शाता है कि भाजपा एकता और सामूहिक शक्ति के महत्व को समझती है और इसे अपनी रणनीति में शामिल कर रही है ताकि आगामी चुनावों में सफलता प्राप्त की जा सके।

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