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क्या है प्रेरणा कार्यक्रम (Prerana Program) ?

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Prerana Program

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने हाल ही में ‘प्रेरणा: एक अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम’ लॉन्च किया है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की आधारशिला है और इसका लक्ष्य सभी प्रतिभागियों को एक सार्थक, अद्वितीय, और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करना है। Prerana Program विशेष रूप से नौवीं से 12वीं कक्षा के चयनित छात्रों के लिए एक सप्ताह तक चलने वाला एक आवासीय कार्यक्रम है। देश के विभिन्न हिस्सों से हर सप्ताह 20 चयनित छात्रों का एक बैच कार्यक्रम में भाग लेगा, जिसमें 10 लड़के और 10 लड़कियां शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम को गुजरात के वर्नाकुलर स्कूल में चलाया जाएगा, जिसे साल 1888 में स्थापित किया गया था। Prerana Program का पाठ्यक्रम आईआईटी गांधीनगर द्वारा तैयार किया गया है और यह नौ विषयों पर आधारित है। इनमें शामिल हैं: स्वाभिमान और विनय, शौर्य और साहस, परिश्रम और समर्पण, करुणा और सेवा, विविधता और एकता, सत्य निष्ठा और सचिता, नवाचार और जिज्ञासा, श्रद्धा और विश्वास, एवं स्वतंत्रता और कर्तव्य। ये विषय युवाओं को प्रेरित करेंगे और भारत की विविधता में एकता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देंगे।

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Prerana Program छात्रों को न केवल शैक्षिक ज्ञान प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी, और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझने में भी मदद करेगा। यह कार्यक्रम छात्रों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने में सहायता करेगा और उन्हें भविष्य के नेताओं और जिम्मेदार नागरिकों के रूप में तैयार करेगा। इस प्रकार, ‘प्रेरणा’ कार्यक्रम भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो छात्रों को जीवन के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र के प्रति समर्पित और सजग बनाने का लक्ष्य रखती है।

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“सा विद्या या विमुक्तये।”

अर्थ – “वही विद्या है जो मुक्ति दिलाए।” यह श्लोक ‘Prerana Program‘ के मूल उद्देश्य को दर्शाता है। शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं बल्कि व्यक्ति की समग्र मुक्ति और विकास है। ‘प्रेरणा’ कार्यक्रम के माध्यम से, छात्रों को न केवल शैक्षिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी, और राष्ट्रीय एकता के महत्व को समझने में भी मदद की जा रही है। यह श्लोक और कार्यक्रम दोनों ही यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शिक्षा वह है जो व्यक्ति को आंतरिक और बाहरी बंधनों से मुक्त कर, उसे एक सजग और सक्रिय नागरिक बनाने में सहायता करती है।

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यह भी जानें –

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1.सामाजिक जिम्मेदारी क्या है?  

सामाजिक जिम्मेदारी व्यक्तियों और संगठनों की वह नैतिकता है जिसके अंतर्गत वे समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते और निभाते हैं। यह उनके द्वारा लिए गए निर्णयों और क्रियाओं के सामाजिक, आर्थिक, और पर्यावरणीय प्रभावों की जिम्मेदारी लेने के बारे में है। सामाजिक जिम्मेदारी में समुदाय के प्रति योगदान, स्वच्छता, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालना शामिल है। यह एक स्थायी और समृद्ध समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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2.वर्नाकुलर स्कूल क्या है?

वर्नाकुलर स्कूल वे शैक्षिक संस्थान होते हैं जहां शिक्षा स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा में प्रदान की जाती है। इन स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करना होता है ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से सीख सकें और अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रह सकें। वर्नाकुलर स्कूल भाषाई विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन स्कूलों में शिक्षा के माध्यम से बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना विकसित होती है।

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3.शिक्षा मंत्रालय क्या है?

शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार का एक विभाग है जो देश में शिक्षा की नीतियों, योजनाओं, और कार्यक्रमों को निर्धारित और संचालित करता है। इसका उद्देश्य भारत में शिक्षा के स्तर को उन्नत करना और सभी के लिए समान शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है। इस मंत्रालय का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता के समय से जुड़ा हुआ है और यह विभिन्न शिक्षा सुधारों और नीतियों के माध्यम से देश की शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने में लगा हुआ है।

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4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्या है?  

राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत सरकार द्वारा निर्धारित एक ढांचा है जो देश में शिक्षा के उद्देश्यों, मानकों, और प्रक्रियाओं को निर्देशित करता है। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, और छात्र-केंद्रित बनाना है। नवीनतम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा के सभी स्तरों पर सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।

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5. छात्र सशक्तिकरण क्या है?

छात्र सशक्तिकरण शिक्षा और विकास की एक प्रक्रिया है जिसमें छात्रों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचने, स्वतंत्र और जिम्मेदार निर्णय लेने, और अपने जीवन और समाज के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाया जाता है। इसमें छात्रों को आत्म-विश्वास, नैतिक मूल्य, और नेतृत्व कौशल प्रदान करना शामिल है। छात्र सशक्तिकरण उन्हें अपने भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाता है।

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6.नैतिक मूल्य क्या हैं?

नैतिक मूल्य वे सिद्धांत हैं जो व्यक्ति के व्यवहार और निर्णयों को निर्देशित करते हैं और यह बताते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। ये मूल्य समाज, संस्कृति, धर्म, और व्यक्तिगत अनुभवों से प्रभावित होते हैं। नैतिक मूल्यों में सत्य, न्याय, ईमानदारी, सम्मान, जिम्मेदारी, और करुणा जैसे गुण शामिल होते हैं। ये मूल्य व्यक्ति को नैतिक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाते हैं।

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7. विविधता और एकता क्या है?

विविधता और एकता भारतीय समाज के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। विविधता का अर्थ है विभिन्न धर्म, जाति, संस्कृति, भाषा, और परंपराओं का सह-अस्तित्व, जबकि एकता का अर्थ है इन सभी विविधताओं के बावजूद एक साथ मिलकर रहना और एक दूसरे का सम्मान करना। भारत ‘विविधता में एकता’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां विभिन्न समुदाय और संस्कृतियां एक साथ मिलकर एक समृद्ध और संगठित समाज का निर्माण करते हैं।

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8.नवाचार क्या है?

नवाचार नए विचारों, उत्पादों, सेवाओं, और प्रक्रियाओं का विकास और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया है। यह रचनात्मकता और मौलिकता पर आधारित होता है और यह समाज, अर्थव्यवस्था, और विज्ञान में प्रगति और सुधार को बढ़ावा देता है। नवाचार समस्याओं के समाधान, उत्पादकता में वृद्धि, और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। यह आज के तेजी से बदलते विश्व में विकास और प्रतिस्पर्धा की कुंजी है।

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