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क्या है मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) ?

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Mission Karmayogi, जिसे राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है, भारत सरकार द्वारा सिविल सेवकों के प्रशिक्षण और विकास को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इसकी शुरुआत 2020 में हुई थी और इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, संस्थागत, और प्रक्रिया स्तरों पर सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए एक नवीन राष्ट्रीय संरचना स्थापित करना है। इस पहल के माध्यम से, सरकार ने एक नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसका लक्ष्य सिविल सेवाओं को अधिक प्रभावी, कुशल, और जवाबदेह बनाना है।

Mission Karmayogi की नींव छह मुख्य स्तंभों पर टिकी है: नीतिगत ढांचा, संस्थागत ढांचा, दक्षता ढांचा, डिजिटल लर्निंग फ्रेमवर्क, आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, और इलेक्ट्रॉनिक मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली। इन स्तंभों के माध्यम से, मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों को उनकी भूमिकाओं के लिए आवश्यक विशिष्ट योग्यताओं और कौशल की पहचान करने, उन्हें विकसित करने, और उनका मूल्यांकन करने की दिशा में मार्गदर्शन करता है।

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इसकी विशेषताओं में एक दक्षता ढांचा शामिल है जो सिविल सेवाओं में विभिन्न भूमिकाओं के लिए आवश्यक विशिष्ट योग्यताओं की पहचान करता है। आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म एक डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफार्म है जो सिविल सेवकों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रम, और संसाधन प्रदान करता है। यह प्लेटफार्म व्यक्तिगत विकास योजनाओं के निर्माण पर जोर देता है और सिविल सेवकों को उनके करियर के विभिन्न चरणों में निरंतर सीखने और विकास के लिए सक्षम बनाता है।

मिशन कर्मयोगी के विस्तारित संस्करण में तीन नई विशेषताएं शामिल हैं: माय आईजीओटी, मिश्रित कार्यक्रम, और क्यूरेटेड प्रोग्राम। माय आईजीओटी एक ऐसा प्लेटफार्म है जो चिन्हित अधिकारी की अद्वितीय क्षमता निर्माण आवश्यकताओं को संबोधित करता है और उन्हें लक्षित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करता है। मिश्रित कार्यक्रम प्रशिक्षण पद्धतियों तक समान पहुंच प्रदान करते हैं और पारंपरिक ऑफलाइन व्यक्तिगत रूप से क्लास रूम को ऑनलाइन शिक्षण अवयवों के साथ एकीकृत करते हैं। क्यूरेटेड प्रोग्राम मंत्रालयों, विभागों, और प्रशिक्षण संस्थानों की विविध शिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

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इस पहल के अंतर्गत, एक व्यापक सिविल सेवा दक्षता एटलस भी विकसित की गई है, जो शासन के विभिन्न स्तरों पर आवश्यक योग्यताओं का विस्तृत मैपिंग प्रदान करता है। यह एटलस सिविल सेवकों को उनकी विशिष्ट भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को विकसित करने में मदद करता है।

मिशन कर्मयोगी के माध्यम से, सरकार ने सिविल सेवाओं में सुधार लाने, प्रशासन को अधिक केंद्रीकृत और मजबूत बनाने, और सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण प्रक्रिया को अधिक व्यापक और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल सिविल सेवकों की क्षमताओं को बढ़ाना है बल्कि भारतीय प्रशासनिक सेवा को अधिक प्रभावी, कुशल, और जवाबदेह बनाना है, जिससे अंततः देश के नागरिकों को बेहतर सेवाएं और सुशासन प्रदान किया जा सके।

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“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥”

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अर्थ- “तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फलों में कभी नहीं। कर्म के फल की इच्छा मत रखो और न ही कर्म न करने का आसक्ति रखो।” यह श्लोक ‘भगवद्गीता’ से लिया गया है और यह कर्म पर ध्यान केंद्रित करने की महत्वपूर्णता पर जोर देता है, न कि केवल फलों पर। ‘मिशन कर्मयोगी’ के संदर्भ में, यह श्लोक उस विचारधारा को प्रतिबिंबित करता है जिस पर यह मिशन आधारित है – सिविल सेवकों को उनके कर्तव्यों के प्रति समर्पित और केंद्रित रखना, बिना परिणामों की चिंता किए। यह उन्हें अपने कार्यों में उत्कृष्टता हासिल करने और बेहतर प्रशासनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे अंततः देश के नागरिकों को लाभ होता है। इस प्रकार, श्लोक ‘मिशन कर्मयोगी’ के उद्देश्यों और आदर्शों के साथ गहराई से जुड़ता है।

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