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अभ्यास साइक्लोन से क्यों लग रही दुश्मनों को मिर्ची

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Exercise Cyclone, India-Egypt Relations

भारत और मिस्र के बीच आयोजित होने वाले ‘अभ्यास साइक्लोन’ का दूसरा संस्करण इस समय काफी चर्चा में है। यह युद्धाभ्यास 1 फरवरी 2024 तक मिस्र के अनशास में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास में भाग लेने के लिए भारतीय थल सेना की 25 कर्मियों वाली टुकड़ी मिस्र पहुंच चुकी है। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। भारतीय दल का प्रतिनिधित्व पैराशूट रेजीमेंट के सैनिकों द्वारा किया जा रहा है, जबकि मिस्र के 25 कर्मियों वाले दल का प्रतिनिधित्व मिस्र के कमांडो स्क्वाड्रन और मिस्र के एयरबोर्न प्लाटून द्वारा किया जा रहा है।

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इस युद्धाभ्यास को तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में सैन्य प्रदर्शनियां और सामरिक बातचीत शामिल होगी। दूसरे चरण में इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) काउंटर आईईडी और कॉम्बैट फर्स्ट एड प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरे और अंतिम चरण में निर्मित क्षेत्र में लड़ाई और बंधक बचाव परिदृश्य पर आधारित संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास शामिल होगा। इस युद्धाभ्यास का पहला संस्करण पिछले साल भारत में आयोजित किया गया था।

इस अभ्यास के माध्यम से, दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद है। यह अभ्यास न केवल सैन्य कौशल को बढ़ाएगा, बल्कि आपसी समझ और विश्वास को भी मजबूत करेगा, जो दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सामरिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। इस तरह के युद्धाभ्यास से न केवल सैन्य तकनीकों का आदान-प्रदान होता है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और शांति के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

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सहयोगेन वृद्धिं यान्ति, सहयोगेन बलं वर्धते।

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अर्थ – सहयोग से विकास होता है, सहयोग से शक्ति बढ़ती है। यह श्लोक ‘अभ्यास साइक्लोन’ के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है। इस श्लोक का अर्थ है कि सहयोग से न केवल विकास होता है, बल्कि शक्ति भी बढ़ती है। इसी प्रकार, भारत और मिस्र के बीच आयोजित इस सैन्य अभ्यास से दोनों देशों के बीच सहयोग और सामरिक संबंध मजबूत होते हैं। यह सहयोग न केवल दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाता है, बल्कि उनके वैश्विक सुरक्षा और शांति में योगदान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, यह श्लोक और ‘अभ्यास साइक्लोन’ दोनों ही सहयोग के महत्व को दर्शाते हैं।

यह भी जानें –

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1.द्विपक्षीय संबंध क्या हैं?

द्विपक्षीय संबंध दो देशों के बीच के राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या सैन्य संबंध होते हैं। इतिहास में, ये संबंध व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से विकसित हुए हैं। द्विपक्षीय संबंध वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक मूलभूत आधार हैं।

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2.सामरिक साझेदारी क्या है?

सामरिक साझेदारी दो या अधिक देशों के बीच एक गहरा और दीर्घकालिक सहयोग होता है, जो आमतौर पर सुरक्षा, रक्षा, और विदेश नीति के क्षेत्रों में होता है। इसका इतिहास शीत युद्ध के दौरान और उसके बाद के वर्षों में विशेष रूप से उभरा, जब देशों ने सामरिक हितों को साझा करने और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सहयोग किया।

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3. रक्षा नीति क्या है?

रक्षा नीति एक देश की उस नीति को कहते हैं जो उसकी सुरक्षा और रक्षा संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करती है। इसका इतिहास राष्ट्र-राज्यों के उदय के साथ शुरू होता है, जब देशों ने अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशिष्ट नीतियां और योजनाएं बनानी शुरू कीं।

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4. रक्षा डिप्लोमेसी क्या है?

रक्षा डिप्लोमेसी वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा देश अपनी रक्षा और सुरक्षा संबंधी हितों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाते हैं। इसका इतिहास आधुनिक युग में और अधिक प्रमुख हुआ, जब देशों ने वैश्विक सुरक्षा और शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्व दिया।

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5. वैश्विक शांति क्या है?
वैश्विक शांति एक ऐसी स्थिति है जहां विश्व के सभी देश आपसी संघर्षों और युद्धों से मुक्त होते हैं। इसका इतिहास विश्व युद्धों के बाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया, जब देशों ने संघर्षों को रोकने और शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और समझौतों का निर्माण किया।

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