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अमेरिका ने खोजा चीन को मात देने वाला खजाना, बदलेगी वैश्विक ताकत की दिशा!

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चीन की आर्थिक समृद्धि और रणनीतिक प्रभुत्व के विरुद्ध एक नया मोड़ आ गया है, जहां अमेरिका को एक ऐसे खजाने का पता चला है, जो चीन की आर्थिकी पर गहरा प्रहार कर सकता है। यह खजाना दुर्लभ पृथ्वी के खनिजों का है, जिनका उपयोग आधुनिक तकनीकी उपकरणों से लेकर ऊर्जा संरक्षण तक के विविध आवश्यक क्षेत्रों में होता है। अमेरिका के वायोमिंग में 2.34 अरब मेट्रिक टन रेयर अर्थ खनिज के भंडार की खोज हुई है, जो विश्व बाजार में चीन की बादशाहत को चुनौती दे सकती है। वर्तमान में, दुनिया की 95% रेयर अर्थ मटेरियल की आपूर्ति चीन से होती है, जो इसे एक प्रमुख रणनीतिक लाभ प्रदान करती है। हालांकि, अमेरिका के हाथ लगे इस खजाने के परिणामस्वरूप, चीन की इस बादशाहत को खतरा है।

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इस खोज से न केवल अमेरिका, बल्कि भारत जैसे देशों को भी लाभ हो सकता है, जो दुर्लभ पृथ्वी के खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। यह खोज न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा और तकनीकी बाजारों में चीन के प्रभुत्व को कम कर सकती है। इस खोज से अमेरिका को नए युग की ऊर्जा और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे स्मार्टफोन, हाइब्रिड कार, एयरक्राफ्ट, लाइट बल्ब और लैंप जैसे उत्पादों में उपयोग होने वाले दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस तरह, अमेरिका और भारत जैसे देशों के लिए यह एक रणनीतिक लाभ के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

धारावर्षति विद्युत्वं गर्भगृह्णति भूतलम्। अप्रत्याशितविद्यानां, क्षेमाय जगतो भवेत्॥

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“जैसे विद्युत् (बिजली) आकाश से पृथ्वी पर आती है, वैसे ही अप्रत्याशित ज्ञान का खजाना धरती से प्रकट होता है, जो समस्त जगत के कल्याण के लिए होता है।” यह श्लोक इस लेख के संदर्भ में यह दर्शाता है कि कैसे अमेरिका में दुर्लभ पृथ्वी के खनिजों की अप्रत्याशित खोज ने वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक संतुलन में एक नया मोड़ ला दिया है। यह खोज न केवल अमेरिका बल्कि विश्व के अन्य देशों के लिए भी कल्याणकारी सिद्ध हो सकती है।

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