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व्लादिमीर पुतिन (Putin) ने लिया 2030 तक सत्ता में रहने का चौंकाने वाला फैसला!

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने 2030 तक सत्ता में बने रहने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन्होंने यूक्रेन (Ukraine) पर हमले के दौरान लिया, जो दशकों में रूस के लिए सबसे जोखिम भरा समय है। पुतिन की लोकप्रियता रूस में अभी भी 80% है, और उनके सलाहकार चुनाव अभियान की तैयारी कर रहे हैं।

यह खबर है कि व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर मार्च के महीने में होने वाले राष्ट्रपति (presidential) चुनाव में अपनी दावेदारी (candidacy) पेश करने का मन बना लिया है, जिससे वे कम से कम 2030 तक सत्ता (power) में बने रहेंगे। यह खबर रॉयटर्स ने छह अनाम स्रोतों (anonymous sources) के हवाले से दी है। उनका यह कदम ऐसे समय पर आया है जब यूक्रेन में उनके सैन्य अभियान (military campaign) ने पश्चिमी देशों के साथ तनाव को एक नया मोड़ दिया है।

पुतिन, जो कि एक पूर्व KGB जासूस (spy) हैं, उन्होंने 1999 के आखिरी दिन बोरिस येल्तसिन से सत्ता संभाली थी और तब से वे रूस के सबसे लंबे समय तक सेवारत (longest-serving) राष्ट्रपति बने हुए हैं। हाल ही में 71 वर्ष के हो चुके पुतिन के घरेलू अनुमोदन रेटिंग्स (domestic approval ratings) काफी उच्च बताई जा रही हैं, जो कि उनकी लोकप्रियता (popularity) का संकेत है।

गुप्त सूत्रों (secret sources) के अनुसार, पुतिन के इस फैसले की भनक (inkling) उनके सलाहकारों (advisors) तक पहुँच गई है और अब वे चुनावी अभियान (electoral campaign) की तैयारियों में जुट गए हैं। एक स्रोत ने बताया कि पुतिन अगले महीने या उसके बाद अपनी उम्मीदवारी की घोषणा (announcement) कर सकते हैं।

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एक अन्य दिलचस्प बात यह है कि क्रेमलिन के प्रवक्ता (spokesman) दिमित्री पेसकोव ने अभी तक इन बातों की पुष्टि नहीं की है, उन्होंने कहा कि पुतिन ने अब तक कोई बयान (statement) नहीं दिया है और चुनाव अभियान अभी तक आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

पुतिन की स्वास्थ्य (health) से जुड़ी अफवाहों (rumors) को क्रेमलिन ने पश्चिमी गलत सूचना (western misinformation) बताया है, और इसी के साथ पुतिन उन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिसका सामना मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ (Soviet Union) के अंतिम वर्षों के दौरान किया था। यूक्रेन में संघर्ष (conflict) के कारण 1962 के क्यूबाई मिसाइल संकट (Cuban Missile Crisis) के बाद से सबसे गंभीर पूर्व-पश्चिम तनाव (East-West tension) पैदा हो गया है।

 

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