मोहाली में हाल ही में घटी एक दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह घटना भारतीय विज्ञान समुदाय के एक होनहार वैज्ञानिक अभिषेक स्वर्णकर के दुखद निधन से जुड़ी है। अभिषेक स्वर्णकर, जो नैनोपार्टिकल्स में विशेषज्ञता रखते थे, का योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता था। उन्होंने स्विट्जरलैंड, यूके और जर्मनी में कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में अपने शोध प्रकाशित किए थे। वह भारत में मोहाली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) में एक शोध परियोजना पर काम करने आए थे।
हालांकि, किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक छोटी सी पार्किंग विवाद जैसी घटना उनके जीवन का अंत कर देगी। इस घटना में एक आईटी इंजीनियर मोंटी नाम के युवक ने उन्हें जान से मार दिया। अभिषेक स्वर्णकर की उम्र मात्र 39 साल थी और उन्होंने अभी तक शादी नहीं की थी। उनका पूरा ध्यान अपने शोध कार्यों पर था। उनके परिवार की पृष्ठभूमि भी काफी प्रेरणादायक रही है। उनकी दोनों बहनें अमेरिका में रहती हैं और उनमें से एक ने अपने भाई को किडनी दान की थी क्योंकि अभिषेक की किडनी 2010 में खराब हो गई थी। बावजूद इसके, वे अपने शोध कार्यों के प्रति बेहद समर्पित थे।
यह घटना 23 मार्च की रात घटी जब अभिषेक स्वर्णकर अपने घर लौटे थे। मोंटी और उसका परिवार उन्हें लगातार परेशान कर रहा था, खासकर पार्किंग को लेकर। अभिषेक एक किराए के घर में रहते थे और उनकी एक साधारण बाइक थी। वहीं, मोंटी के पास दो कारें थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब मोंटी ने अभिषेक को अपने घर के सामने बाइक खड़ी करने से मना किया। अभिषेक ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन मोंटी और उसके परिवार ने इसे लेकर काफी हंगामा किया।
अभिषेक की मां, मालती देवी, ने बताया कि जब उनका बेटा घर लौटा तो मोंटी और उसके परिवार ने उसे फिर से परेशान करना शुरू कर दिया। वे लगातार धमकियां दे रहे थे और गाली-गलौज कर रहे थे। अभिषेक ने विरोध किया और कहा कि वह इस मामले की शिकायत करेगा। लेकिन इसी दौरान मोंटी ने उन्हें जोर से धक्का दिया, जिससे वह गिर गए और बेहोश हो गए। चूंकि अभिषेक पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, इस धक्के ने उनकी हालत और बिगाड़ दी।
घबराए मोंटी ने उन्हें तुरंत अपनी कार में डालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद मोंटी मौके से फरार हो गया, लेकिन तीन दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह मामला देश में कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है, जहां छोटी-छोटी बातों पर लोग हिंसक हो जाते हैं और किसी की जान लेने से भी नहीं हिचकिचाते।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में वैज्ञानिकों और विद्वानों को वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। दुनिया के विकसित देश, जैसे अमेरिका, जर्मनी और चीन, अपने वैज्ञानिकों को हर संभव सुविधा प्रदान करते हैं ताकि वे देश की प्रगति में योगदान दे सकें। लेकिन भारत में स्थिति इसके विपरीत है। यहां आमतौर पर वे लोग ही सम्मान पाते हैं जो लोकप्रियता के आधार पर प्रसिद्ध होते हैं, जबकि असली प्रतिभाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
भारत सरकार और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को न केवल सुरक्षा दी जानी चाहिए, बल्कि उन्हें हर संभव सहायता भी मिलनी चाहिए। स्टेम (STEM – साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिकों के लिए विशेष नीतियां बनानी चाहिए ताकि वे बिना किसी डर के अपने अनुसंधान कार्यों में लगे रहें।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय समाज में सहिष्णुता की कितनी कमी है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े गंभीर परिणाम दे सकते हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है ताकि कोई भी व्यक्ति किसी वैज्ञानिक या सामान्य नागरिक के साथ इस तरह का व्यवहार करने की हिम्मत न करे।
अंत में, यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या भारत वास्तव में एक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है, या फिर हम अब भी सामाजिक कुरीतियों और हिंसक प्रवृत्तियों से जूझ रहे हैं। अभिषेक स्वर्णकर जैसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक का इस तरह से मारा जाना पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। अगर हम अपने विद्वानों और शोधकर्ताओं को सुरक्षित माहौल नहीं दे सकते, तो हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे देश के लिए कुछ बड़ा करेंगे? सरकार को चाहिए कि इस मामले में सख्त कदम उठाए और अभिषेक के परिवार को न्याय दिलाए। साथ ही, समाज को भी इस तरह की घटनाओं से सबक लेना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी दोबारा न हो।