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Earn Lakhs from Marigold Farming: गेंदा की खेती से होगी बंपर कमाई!

NCIkrishi1 week ago

 

Earn Lakhs from Marigold Farming!

बरसात के मौसम में गेंदा फूल की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक अवसर साबित हो सकती है। गेंदा फूल की मांग त्योहारों के समय अत्यधिक बढ़ जाती है, विशेषकर गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के अवसर पर। यदि किसान सही समय पर गेंदा की खेती करते हैं, तो वे त्योहारों के सीजन में अच्छी कीमत प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले किसान को गेंदा की नर्सरी तैयार करनी होती है, जो 15 जून से 30 जून के बीच लगाई जा सकती है। नर्सरी तैयार होने के लगभग 25-30 दिनों बाद पौधों को खेत में ट्रांसप्लांट किया जाता है, जिससे सितंबर माह में पहली फसल प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार, त्योहारों के दौरान सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में लगातार उत्पादन लेने की योजना बनाई जा सकती है।

गेंदा की खेती में अच्छे उत्पादन के लिए सही बीजों का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार के गेंदा फूल उगाए जाते हैं—अफ्रीकी गेंदा और फ्रेंच गेंदा। अफ्रीकी गेंदा आकार में बड़ा होता है और इसकी मांग भी अधिक होती है, इसलिए किसानों को इसी किस्म का चयन करने की सलाह दी जाती है। उन्नत किस्मों में ‘उषा’, ‘नंगी गेंदा’ और ‘ईमानदारी सीट्स’ प्रमुख हैं, जो बेहतर उत्पादन देती हैं। बीजों की कीमत किस्म के आधार पर बदलती रहती है, लेकिन टेनिस बॉल किस्म के बीज सबसे अधिक लोकप्रिय हैं क्योंकि इनके फूल बड़े और वजनदार होते हैं, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

नर्सरी तैयार करने के लिए किसान पारंपरिक विधियों की बजाय उन्नत तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि कोकोपीट माध्यम में बीज अंकुरित करना। इससे पौधे अधिक स्वस्थ और मजबूत होते हैं। नर्सरी तैयार होने के बाद पौधों को खेत में 8000 से 10000 पौधे प्रति एकड़ के हिसाब से ट्रांसप्लांट किया जाता है। बीजों की लागत लगभग 24000 रुपये प्रति एकड़ आती है, जो कुल खर्च का 50% होता है। इस कारण, सही बीजों का चयन और उचित देखभाल बहुत जरूरी है ताकि उत्पादन अधिक हो और किसानों को मुनाफा मिल सके।

गेंदा की फसल पर कीट और रोगों का हमला एक प्रमुख समस्या है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी होता है। प्रमुख कीटों में रस चूसने वाले कीट और लाल मकड़ी का प्रकोप देखने को मिलता है। कीटनाशकों का सही तरीके से उपयोग कर इनसे बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा, फंगस जनित रोगों जैसे झुलसा (blight) का भी अटैक देखा जाता है। शुरुआत में हल्के भूरे धब्बे पत्तियों पर दिखते हैं, जो बाद में पूरी पत्ती को प्रभावित कर देते हैं। इससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन घट सकता है। किसानों को फंगीसाइड्स का उपयोग कर समय रहते इस समस्या का समाधान करना चाहिए।

लाल मकड़ी के हमले से बचने के लिए किसानों को गेंदा की फसल के चारों ओर प्याज के पौधे लगाने चाहिए। यह एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है और फसल को नुकसान से बचाने में सहायक होता है। इसके अलावा, गेंदा फूल की खेती में अंतरफसली प्रणाली (intercropping) को अपनाना फायदेमंद हो सकता है। किसानों को गेंदा के साथ हरा प्याज, पपीता या अन्य फसलें उगानी चाहिए, जिससे उत्पादन की क्षमता और लाभ दोनों बढ़ सकते हैं। हरे प्याज की फसल मात्र 45 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी आमदनी हो सकती है और साथ ही गेंदा के पौधों के विकास के लिए बेहतर माहौल मिलता है।

गेंदा की फसल का निरंतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए ‘पिचिंग’ विधि का उपयोग किया जाता है। इसमें पौधे की ऊपरी कली को तोड़ा जाता है, जिससे फूलों की संख्या और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। पिचिंग को ट्रांसप्लांटिंग के 30 दिनों बाद शुरू किया जाता है। यदि किसान सितंबर से नवंबर तक लगातार उत्पादन चाहते हैं, तो उन्हें पिचिंग को चार चरणों में विभाजित करना चाहिए। पहले चरण में खेत के एक हिस्से की पिचिंग की जाती है, फिर 5 दिन बाद दूसरे हिस्से की, उसके 10 दिन बाद तीसरे हिस्से की और अंत में 15 दिन बाद चौथे हिस्से की पिचिंग की जाती है। इस तरह उत्पादन एक ही समय में न आकर धीरे-धीरे होता है, जिससे बाजार में फूलों की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है और किसानों को अधिक मुनाफा मिलता है।

बरसात के मौसम में गेंदा की खेती करते समय जल निकासी (drainage) की उचित व्यवस्था बहुत आवश्यक होती है, क्योंकि अधिक पानी रुकने से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए जैविक खाद और उर्वरकों का सही संतुलन बनाए रखना चाहिए। नत्रजन, फॉस्फोरस और पोटाश की सही मात्रा में आपूर्ति से पौधे स्वस्थ रहते हैं और फूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को उचित मात्रा में नमी मिलती रहती है।

किसानों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि वे अपनी उपज को सही समय पर बाजार में ले जाएं ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके। बाजार में फूलों की मांग और कीमतों की जानकारी रखते हुए विक्रय योजना बनानी चाहिए। स्थानीय बाजारों के अलावा, बड़े शहरों और फूल मंडियों में भी गेंदा फूल की अच्छी मांग होती है। इसके अलावा, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर भी किसान अपने फूलों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं, जिससे उन्हें बिचौलियों से बचकर अधिक लाभ मिल सकता है।

अंततः, गेंदा फूल की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन व्यवसायिक अवसर साबित हो सकती है, यदि इसे सही तकनीकों और उचित देखभाल के साथ किया जाए। त्योहारों के समय इसकी मांग अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है। यदि वे सही बीजों का चयन करें, उन्नत विधियों से नर्सरी तैयार करें, कीट एवं रोगों से बचाव करें, और फसल प्रबंधन को व्यवस्थित तरीके से अपनाएं, तो गेंदा की खेती उनके लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है। बरसात के मौसम में गेंदा की खेती न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों को फूलों की खेती में एक नया आयाम भी देती है, जिससे वे अपनी कृषि आय को बढ़ा सकते हैं।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से है। यह सामग्री विशेषज्ञ सलाह या सटीक व्यावसायिक मार्गदर्शन का विकल्प नहीं है। खेती से संबंधित किसी भी निर्णय को लेने से पहले कृपया विशेषज्ञों से परामर्श करें और अपनी स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लें। लेख में उपयोग की गई किसी भी जानकारी से उत्पन्न होने वाले किसी भी लाभ या नुकसान के लिए लेखक या प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होंगे। खेती के दौरान सभी सरकारी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

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