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Hyderabad Fish Medicine : अस्थमा की बीमारी होगी दूर ? क्या है प्रक्रिया और कैसे पहुँचे ?

NCIRNhot1 month ago

Hyderabad Fish Medicine

 भारत में कई पारंपरिक उपचार विधियाँ सदियों से प्रचलित रही हैं, जिनमें से कुछ विज्ञान और चिकित्सा की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जबकि कुछ पर संदेह बना रहता है। अस्थमा (Asthma) के इलाज के लिए एक अनूठी परंपरा दक्षिण भारत के हैदराबाद में देखी जाती है, जहाँ हर साल हज़ारों लोग एक विशेष मछली को निगलने के लिए आते हैं, यह विश्वास करते हुए कि इससे उनकी अस्थमा की बीमारी दूर हो जाएगी। यह प्रक्रिया “फिश प्रसादम” (Fish Prasadam) के नाम से जानी जाती है और इसे गोउड़ परिवार द्वारा पीढ़ियों से किया जा रहा है। हालाँकि, वैज्ञानिकों और डॉक्टरों का कहना है कि इस उपचार के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं।

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फिश प्रसादम का आयोजन हर साल जून के महीने में किया जाता है, इस इलाज की शुरुआत 1845 में हुई थी, जब हिमालय से आए एक संत ने गौड़ परिवार के पूर्वजों को यह चमत्कारी दवा दी थी। तब से यह परिवार इसे आगे बढ़ा रहा है। यह भी कहा जाता है कि इस दवाई का असर तभी होता है जब इसे नि:स्वार्थ भाव से दिया जाए, इसलिए गौड़ परिवार इसे मुफ्त में वितरित करता है। इस आयोजन के दौरान सरकार की ओर से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। मरीजों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था की जाती है, और प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है।

दवा बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय (Confidential) रखी जाती है। इसे तैयार करने के लिए विशेष पूजा की जाती है, जिसमें केवल गौड़ परिवार के सदस्य ही शामिल होते हैं। पूजा के बाद इसे सार्वजनिक रूप से पेश किया जाता है, और फिर इसे सरकारी निगरानी में ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। वहां हजारों लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं। हर व्यक्ति के हाथ में पानी से भरी एक थैली होती है, जिसमें एक छोटी मछली रखी होती है। जैसे ही 6 बजे का समय होता है, लोग दवा लेने के लिए आगे बढ़ते हैं, और इस दौरान प्रशासन को भीड़ को संभालने में काफी मुश्किल होती है।

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इस प्रक्रिया में छोटी “मुरेल” (Murrel) मछली का उपयोग किया जाता है, जिसे स्थानीय लोग “पोलासा” (Polasa) मछली भी कहते हैं। जब यह मछली हर्बल पेस्ट के साथ मरीज़ के गले से नीचे जाती है, तो यह माना जाता है कि यह दवा सीधी फेफड़ों (Lungs) तक पहुँचती है और श्वसन तंत्र (Respiratory System) को साफ कर देती है, जिससे अस्थमा की तकलीफ कम हो जाती है। जिन लोगों को मछली निगलने में दिक्कत होती है, उनके लिए यह दवा गोलियों के रूप में भी दी जाती है।

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फिश प्रसादम को लेकर कई तरह की राय हैं। कुछ मरीज़ों का दावा है कि इससे उन्हें काफी राहत मिली है और वे हर साल इस उपचार को करवाने के लिए आते हैं। वहीं, डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रक्रिया के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इसे करने से पहले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और अन्य स्वास्थ्य संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया को अभी तक किसी वैज्ञानिक अध्ययन में प्रमाणित नहीं किया गया है।

इस आयोजन का एक और खास पहलू यह है कि इसे पूरी तरह से गैर-व्यावसायिक (Non-Commercial) रखा गया है। न तो इससे कोई पैसा कमाया जाता है और न ही इसका कोई प्रचार किया जाता है। केवल पारंपरिक विश्वास और लोगों के अनुभव इसे आज तक जीवित रखे हुए हैं। हालांकि यह इलाज केवल एक दिन के लिए उपलब्ध होता है, लेकिन इसके लिए लोग साल भर इंतजार करते हैं। प्रशासन भी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश करता है, ताकि लाखों लोग बिना किसी परेशानी के यह दवाई ले सकें।

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चिकित्सकों के अनुसार, अस्थमा एक पुरानी बीमारी है जो श्वसन नलियों (Bronchial Tubes) में सूजन (Inflammation) के कारण होती है। इस बीमारी के लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट (Wheezing) शामिल हैं। आमतौर पर इसका इलाज इनहेलर (Inhaler), स्टेरॉयड (Steroids) और अन्य दवाओं से किया जाता है, जो कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि अगर यह हर्बल पेस्ट वास्तव में असरदार होता, तो इसे बड़े पैमाने पर अनुसंधान करके अस्थमा की दवाओं में शामिल किया जाता।

हैदराबाद का यह आयोजन हर साल लाखों लोगों को आकर्षित करता है, और सरकार भी इसकी तैयारियों में सहयोग करती है। इस आयोजन के लिए विशेष बसें चलाई जाती हैं, अस्थायी चिकित्सा केंद्र (Medical Camps) बनाए जाते हैं, और पुलिस व्यवस्था भी की जाती है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। हालाँकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को केवल पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर इस तरह के उपचारों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए और किसी भी चिकित्सा पद्धति को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

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हैदराबाद में फिश मेडिसिन देने की प्रक्रिया एक निश्चित चरणों के तहत की जाती है, जो वर्षों से बिना किसी बदलाव के जारी है। यहां इस प्रक्रिया के मुख्य चरण दिए गए हैं:

* पंजीकरण (Registration): मरीजों को सबसे पहले एग्जिबिशन ग्राउंड (Exhibition Grounds) पहुंचकर अपना नाम पंजीकृत कराना होता है। यह पंजीकरण आमतौर पर दवाई देने के एक दिन पहले किया जाता है।

* दवा की तैयारी (Preparation of the Medicine): बथिनी गौड़ परिवार (Bathini Goud Family) एक पारंपरिक विधि के अनुसार इस गुप्त हर्बल पेस्ट को तैयार करता है। इस पेस्ट में कौन-कौन से घटक (Ingredients) होते हैं, यह पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।

* दवा देना (Administration): तैयार किए गए हर्बल पेस्ट को जिंदा मुररेल मछली (Murrel Fish) के मुंह में डाला जाता है। इसके बाद मरीज को यह मछली पूरी तरह निगलनी होती है। ऐसा माना जाता है कि जब मछली को जिंदा निगला जाता है, तब यह प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है।

* दवा लेने के बाद के निर्देश (Post-Medicine Guidelines): मरीजों को 45 दिनों तक एक विशेष आहार और जीवनशैली का पालन करने की सलाह दी जाती है। यह विशेष आहार और नियम बथिनी गौड़ परिवार द्वारा बताए जाते हैं, जिससे दवा का प्रभाव बेहतर होने की उम्मीद की जाती है।

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हैदराबाद फिश प्रसादम का स्थान (Location), कैसे पहुँचे?

हैदराबाद में फिश मेडिसिन का वितरण नामपल्ली (Nampally) के एग्जिबिशन ग्राउंड (Exhibition Grounds) में किया जाता है, इसलिए इसे नामपल्ली फिश मेडिसिन भी कहा जाता है। यह स्थान शहर के विभिन्न हिस्सों से आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिससे बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में भाग ले सकते हैं। यहां पहुंचने के विभिन्न तरीके दिए गए हैं:

* हवाई मार्ग से (By Air): हैदराबाद का निकटतम हवाई अड्डा राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Rajiv Gandhi International Airport) है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके नामपल्ली के एग्जिबिशन ग्राउंड तक पहुंच सकते हैं।

* रेल मार्ग से (By Train): नामपल्ली रेलवे स्टेशन (Nampally Railway Station), जिसे हैदराबाद डेक्कन रेलवे स्टेशन (Hyderabad Deccan Railway Station) के नाम से भी जाना जाता है, एग्जिबिशन ग्राउंड के काफी करीब स्थित है। यह रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

* बस सेवा से (By Bus): तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TSRTC) हैदराबाद के विभिन्न हिस्सों से नामपल्ली के लिए नियमित बस सेवाएं संचालित करता है। इसके अलावा, TSRTC विशेष बसें भी चलाता है, जो सीधे एग्जिबिशन ग्राउंड में आयोजित फिश मेडिसिन कार्यक्रम तक जाती हैं।

* सड़क मार्ग से (By Road): नामपल्ली सड़क मार्ग द्वारा भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप यहां आसानी से कार, टैक्सी या निजी वाहन के माध्यम से पहुंच सकते हैं।

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