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Cyber War Begins! क्या भारत पर मंडरा रहा है खतरा?

NCIRNvimarsh1 week ago

Cyber War Begins!

 सदियों से युद्ध के तरीकों में बदलाव आया है। पहले तलवारों और बंदूकों का इस्तेमाल होता था, फिर परमाणु हथियारों ने युद्ध की दिशा बदली और अब साइबर युद्ध (Cyber War) का दौर शुरू हो चुका है। आज देशों के बीच सिर्फ सैन्य संघर्ष ही नहीं होते, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी जंग लड़ी जा रही है। साइबर हमले (Cyber Attacks) किसी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनता के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। इसी संदर्भ में अमेरिका ने हाल ही में रूस के खिलाफ अपने साइबर हमलों को रोकने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक साइबर सुरक्षा समुदाय में हलचल मच गई है। अमेरिका पहले रूस के हैकर्स (Hackers) को रोकने के लिए आक्रामक साइबर हमले करता था, लेकिन अब उसने खुद को केवल रक्षा (Defense) तक सीमित रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के पीछे की वजहें क्या हो सकती हैं और इसका भारत सहित अन्य देशों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे समझना बेहद जरूरी है।

साइबर अटैक का मतलब है किसी कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क या डाटा में जबरन घुसपैठ (Hacking) करना। इसका मकसद डेटा चोरी, वित्तीय नुकसान पहुंचाना या कामकाज ठप करना हो सकता है। ये हमले किसी व्यक्ति, कंपनी, सरकार या पूरे देश को भी निशाना बना सकते हैं। भारत साइबर हमलों के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर आता है, अमेरिका इस सूची में पहले स्थान पर है। जब किसी देश की महत्वपूर्ण जानकारी हैक हो जाती है या उससे छेड़छाड़ की जाती है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाता है।

2017 में हुआ वानाक्राई (WannaCry) रैनसमवेयर अटैक इसका बड़ा उदाहरण था। इस हमले ने 150 से अधिक देशों को प्रभावित किया था, जिनमें ब्रिटेन, भारत, रूस और अमेरिका शामिल थे। ब्रिटेन में हॉस्पिटल सिस्टम ठप हो गया था, मरीजों का इलाज रुक गया था और भारत में सरकारी दफ्तरों के कंप्यूटर लॉक हो गए थे। इस हमले को उत्तर कोरिया से जोड़ा गया था। इसी तरह 2021 में एक रूसी हैकर ग्रुप ‘डार्कसाइड’ (DarkSide) ने अमेरिका की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन हैक कर ली थी, जिससे ईस्ट कोस्ट में गैस सप्लाई ठप हो गई थी। इस वजह से कीमतें बढ़ गईं और अमेरिकी सरकार को 44 लाख डॉलर की फिरौती चुकानी पड़ी थी।

यूक्रेन-रूस युद्ध (Ukraine-Russia War) के दौरान भी साइबर हमले एक बड़ा हथियार बने। रूस की साइबर सेना ने यूक्रेनी सरकार, वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा और मीडिया सेक्टर को निशाना बनाया, जिससे देश अस्थिर हो जाए। इससे साफ है कि साइबर अटैक केवल डिजिटल हमलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं, आवश्यक सेवाओं में बाधा डाल सकते हैं और यहां तक कि सैन्य संघर्षों को भी जन्म दे सकते हैं। कई बार इन हमलों के जरिए देशों की जासूसी (Espionage) की जाती है और यहां तक कि चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशें भी की जाती हैं।

दुनिया भर के देश इन खतरों से बचने के लिए अपनी साइबर सुरक्षा एजेंसियों को मजबूत कर रहे हैं। भारत में “नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन” (National Technical Research Organisation – NTRO) साइबर सुरक्षा और टेक्निकल इंटेलिजेंस को संभालता है। साइबर अटैक के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत भी अपने सुरक्षा उपायों को मजबूत कर रहा है।

अब सवाल उठता है कि जब साइबर हमलों का इतना बड़ा खतरा है तो अमेरिका ने रूस के खिलाफ अपने साइबर हमले क्यों रोक दिए? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से अपने संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हों, खासतौर पर यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए। कुछ साइबर विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिका अब अपनी पूरी ऊर्जा चीन के खिलाफ आक्रामक साइबर ऑपरेशन (Cyber Operations) पर केंद्रित करना चाहता है, क्योंकि चीन की साइबर क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं।

इस फैसले का भारत पर भी असर पड़ सकता है। भारत के रूस से अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों ने एआई (AI) और साइबर टेक्नोलॉजी पर मिलकर कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। ऐसे में अगर अमेरिका रूस से दूरी बनाता है और चीन की ओर अपना ध्यान केंद्रित करता है, तो भारत को अपनी रणनीति बेहद सोच-समझकर बनानी होगी। भारत पहले ही कई बार चीनी हैकर्स (Chinese Hackers) के हमलों का सामना कर चुका है।

तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके साथ साइबर हमलों के खतरे भी बढ़ रहे हैं। 2024 के बजट में भारत ने साइबर सुरक्षा के लिए अधिक राशि आवंटित की है, जिससे उन्नत सुरक्षा सिस्टम विकसित किए जा सकें जो साइबर हमलों का पता लगाने और उन्हें रोकने में सक्षम हों। खासतौर पर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) मिनट दर मिनट और अधिक शक्तिशाली होता जा रहा है।

साइबर युद्ध अब केवल एक संभावित खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह वर्तमान में हो रहा है और इसका असर दुनिया के लगभग हर देश पर पड़ रहा है। जो देश अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत नहीं करेंगे, वे बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं। भारत को भी इस डिजिटल युद्ध में अपनी स्थिति मजबूत करने की जरूरत है, ताकि किसी भी प्रकार के साइबर हमले से बचा जा सके।

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