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IPL 2025 |
आईपीएल (IPL) भारत में क्रिकेट का एक सबसे बड़ा त्योहार बन चुका है, जो न केवल खेल बल्कि मनोरंजन और ग्लैमर का भी संगम है। हाल ही में आईपीएल की भव्यता और इसकी लोकप्रियता को देखकर पाकिस्तान में एक अलग तरह की बेचैनी देखी जा रही है। पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) की तुलना में आईपीएल के विशाल स्तर और इसकी अपार सफलता ने पाकिस्तानियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों उनका टूर्नामेंट आईपीएल जितना सफल नहीं हो पा रहा। पाकिस्तान के कुछ खेल विशेषज्ञों ने इस पर चर्चा करते हुए कहा कि आईपीएल एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है, जबकि पीएसएल अभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंच सका है। आईपीएल के बड़े स्टेडियम, भरे हुए दर्शक, बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी और क्रिकेट के दिग्गजों का जुड़ाव इसे अलग स्तर पर ले जाता है।
आईपीएल की तुलना में पीएसएल में न केवल आर्थिक निवेश कम है, बल्कि इसका दायरा भी बहुत सीमित है। पाकिस्तान के क्रिकेट स्टेडियम्स खाली नजर आते हैं, जबकि आईपीएल में एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है। आईपीएल सिर्फ एक खेल टूर्नामेंट नहीं बल्कि एक महोत्सव बन चुका है जिसमें क्रिकेट और मनोरंजन का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। ओपनिंग सेरेमनी में बॉलीवुड के बड़े सितारे जैसे शाहरुख खान, विराट कोहली और अन्य बड़े नाम इसे और भव्य बना देते हैं। पाकिस्तान में यह सब संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि वहां क्रिकेट और मनोरंजन को मिलाकर एक बड़े स्तर पर पेश करने की क्षमता अभी विकसित नहीं हुई है।
आईपीएल की सफलता का एक बड़ा कारण उसका विशाल टैलेंट पूल है। पहले भारतीय क्रिकेट टीम में केवल कुछ ही बड़े शहरों के खिलाड़ी नजर आते थे, लेकिन आईपीएल ने छोटे शहरों के खिलाड़ियों को भी पहचान दिलाई। रांची से निकले महेंद्र सिंह धोनी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो कभी किसी ने नहीं सोचा था कि भारतीय क्रिकेट का इतना बड़ा सितारा बनेंगे। आईपीएल में हर साल नए-नए खिलाड़ी उभर कर आते हैं, जैसे हाल ही में रिंकू सिंह, सूर्यकुमार यादव और अन्य कई नाम आईपीएल की देन हैं। मुंबई इंडियंस जैसी टीमें युवा खिलाड़ियों को न केवल मौका देती हैं बल्कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका और अन्य जगहों पर ट्रेनिंग के लिए भी भेजती हैं। इस तरह की प्रोफेशनल अप्रोच पीएसएल में देखने को नहीं मिलती, जहां टैलेंट की सही पहचान और ग्रूमिंग (निखारने) की सुविधाएं नहीं हैं।
एक और बड़ा अंतर यह है कि आईपीएल में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कोच और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी टीमों के साथ जुड़े होते हैं। मुंबई इंडियंस के साथ सचिन तेंदुलकर, पंजाब किंग्स के साथ रिकी पोंटिंग और जयवर्धने जैसे नाम जुड़े हुए हैं, जो खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय ट्रेनिंग और मार्गदर्शन देते हैं। इसके विपरीत, पीएसएल की टीमों के पास इस तरह का मार्गदर्शन नहीं है, जिससे उनकी टीमें आईपीएल की तुलना में कमजोर नजर आती हैं।
पाकिस्तान में क्रिकेट का माहौल भी धीरे-धीरे खराब हो रहा है। वहां सिनेमा हॉल तक बंद हो गए हैं, इंडियन फिल्मों पर बैन लगा दिया गया है और मनोरंजन का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। क्रिकेट भी इस ट्रेंड का शिकार हो रहा है, जहां लोगों की दिलचस्पी और जुड़ाव लगातार कम हो रहा है। वहीं, भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता हर साल नई ऊंचाइयों को छू रही है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) का मजबूत आर्थिक ढांचा और मीडिया के साथ उनका सहयोग भी आईपीएल की सफलता का एक अहम कारण है।
पाकिस्तान के टेलीविजन चैनलों पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस हो रही है। कई पाकिस्तानी विशेषज्ञ मानते हैं कि आईपीएल के डगआउट्स (टीमों के बैठने की जगह) में बैठे दिग्गज खिलाड़ी खिलाड़ियों को निखारते हैं, जबकि पीएसएल में ऐसा नहीं हो पाता। भारतीय खिलाड़ियों को वेस्ट इंडीज, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के कोचेस से ट्रेनिंग मिलती है, जिससे वे और बेहतर बनते हैं। वहीं, पाकिस्तान के खिलाड़ियों को ऐसी ट्रेनिंग मिलने के कम मौके मिलते हैं, जिससे उनकी क्रिकेट की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
आईपीएल की तुलना में पीएसएल का ब्रॉडकास्टिंग (प्रसारण) और मीडिया कवरेज भी कमजोर है। भारत में आईपीएल का मैच देखना किसी त्योहार से कम नहीं होता, हर जगह इसकी चर्चा होती है, सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता है, विज्ञापन कंपनियां इसमें करोड़ों का निवेश करती हैं। वहीं, पाकिस्तान में पीएसएल को वह मीडिया कवरेज नहीं मिल पाती, जिससे इसका ग्लोबल ब्रांड वैल्यू (ब्रांड मूल्य) कम हो जाता है।
पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और भ्रष्टाचार भी उनके क्रिकेट के विकास में बाधा बन रहे हैं। वहां के आर्मी चीफ और बड़े नेताओं के रिश्तेदारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब से पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने पदभार संभाला है, उनके रिश्तेदारों को बड़े-बड़े पदों पर बिठाया गया है और उन्होंने इस अवसर का लाभ उठाते हुए करोड़ों की संपत्ति बनाई है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के हालिया भाषण को भी काफी कमजोर माना गया, जिसमें उन्होंने भारत के खिलाफ बयान तो दिया, लेकिन वह आत्मविश्वास नहीं झलक रहा था जो एक मजबूत राष्ट्र के नेता में होना चाहिए।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान में धार्मिक अंधविश्वास भी बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एक मौलाना ने दावा किया कि अगर कोई शहादत की उंगली से “जमजम” लिखेगा तो उसका बिजली का बिल आधा हो जाएगा। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और खुद पाकिस्तान के लोग इस पर मजाक बनाने लगे। इससे यह भी साफ होता है कि पाकिस्तान की अव्यवस्था केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के हर क्षेत्र में दिख रही है।
दूसरी तरफ, भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। डिजिटल पेमेंट्स, ऑनलाइन बैंकिंग, और तकनीकी विकास में भारत ने एक नया आयाम स्थापित किया है। आज भारतीय लोग यूपीआई (UPI) और डिजिटल ट्रांजेक्शन्स (लेनदेन) को प्राथमिकता देते हैं, जबकि पाकिस्तान में अब भी कैश पर निर्भरता अधिक है। इससे यह भी समझ में आता है कि जहां भारत लगातार आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान अपने पुराने ढर्रे से बाहर नहीं आ पा रहा।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान में आईपीएल की सफलता को देखकर एक जलन और निराशा का माहौल है। पीएसएल और आईपीएल की तुलना करना ही गलत है, क्योंकि दोनों टूर्नामेंट के स्तर में जमीन-आसमान का अंतर है। आईपीएल एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है, जबकि पीएसएल अभी भी अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। जब तक पाकिस्तान अपनी क्रिकेट संरचना, आर्थिक निवेश, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं करता, तब तक वह आईपीएल की बराबरी नहीं कर सकता। फिलहाल, पाकिस्तानियों के पास आईपीएल को दूर से देखने और इसकी सफलता पर चर्चा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।