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India’s Deadly Kamikaze Drone! दुश्मन पर बरसेगा कहर!

NCIvimarsh6 days ago

India’s Deadly Kamikaze Drone!

 विमान और रक्षा तकनीकों में हो रहे नए बदलावों के बीच भारत भी तेजी से अपने आत्मनिर्भर रक्षा उपकरणों को विकसित करने में लगा हुआ है। इसी दिशा में भारत की नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेट्रीज़ (NAL) ने ड्रोन तकनीक में बड़े कदम उठाए हैं। यह एजेंसी विशेष रूप से एयरक्राफ्ट्स और अन्य एयरोस्पेस उपकरणों को विकसित करने पर काम करती है। भारत के बेंगलुरु में स्थित इस प्रयोगशाला की स्थापना 1959 में दिल्ली में की गई थी और इसके पहले निदेशक पी. नीलकंठ थे। समय के साथ, यह प्रयोगशाला विकसित होती गई और इसे बेंगलुरु में स्थानांतरित किया गया, जहां इसे और भी मजबूत बनाया गया।

हाल ही में, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध हुआ, तो वहां भारी मात्रा में कामिकाज़े ड्रोन (Kamikaze Drone) का इस्तेमाल देखा गया। रूस ने लगभग 500 कामिकाज़े ड्रोन यूक्रेन पर छोड़े, जिनकी कीमत लगभग 500 डॉलर प्रति ड्रोन थी। इन ड्रोन का मुख्य उद्देश्य होता है कि यह दुश्मन के क्षेत्र में जाकर खुद को नष्ट कर लेता है और साथ ही अपने लक्ष्य को भी समाप्त कर देता है। इसी तर्ज पर अमेरिका ने भी यूक्रेन को 4200 ऐसे ड्रोन सप्लाई किए थे, जबकि रूस को यह ड्रोन ईरान से मिले थे। इजराइल ने भी हमास पर हमला करने के लिए कामिकाज़े ड्रोन का उपयोग किया था।

कामिकाज़े शब्द की उत्पत्ति जापान से हुई थी और इसका इतिहास द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा हुआ है। उस समय, जापान के पायलट अपने हवाई जहाज को दुश्मन की सीमाओं में ले जाकर वहीं विस्फोट कर देते थे। इस तरह के आत्मघाती हमलों को ‘सुसाइड अटैक’ कहा जाता था। यही सिद्धांत आज ड्रोन तकनीक में भी अपनाया जा रहा है, जहां ड्रोन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह लक्ष्य पर जाकर टकराए और अपने साथ-साथ दुश्मन को भी खत्म कर दे।

भारत ने भी अपने खुद के कामिकाज़े ड्रोन विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा लिए हैं। इस ड्रोन की चौड़ाई लगभग 3.5 मीटर और लंबाई 2.8 मीटर है, जो इसे एक इंसान के आकार के बराबर बनाती है। यह लगभग 120 किलो तक का भार उठा सकता है और 25 किलो विस्फोटक लेकर उड़ सकता है। यह ड्रोन लगातार 9 घंटे तक उड़ सकता है, और वैज्ञानिक इस समय सीमा को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं ताकि यह 24 घंटे तक दुश्मन के ठिकानों की निगरानी कर सके।

इस ड्रोन में वेंकल रोटरी इंजन (Wankel Rotary Engine) लगाया गया है, जो एक प्रकार का आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) होता है। यह इंजन हल्का और कॉम्पैक्ट (Compact) है, जिससे ड्रोन की गति और दक्षता में सुधार होता है। इसके अलावा, इसमें हाई पावर-टू-वेट रेशियो (High Power-to-Weight Ratio) भी दिया गया है, जिससे यह अधिक ऊर्जा का उपयोग कर कम वजन के साथ काम कर सकता है।

भारत में कामिकाज़े ड्रोन की उपयोगिता इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह दुश्मन के टैंकों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। अगर तुलना करें, तो एक टैंक जिसकी लागत करोड़ों रुपये होती है, उसके मुकाबले 500 डॉलर के एक छोटे ड्रोन का उपयोग करना कहीं अधिक किफायती विकल्प है। इस तरह, अगर बड़ी संख्या में ड्रोन तैनात कर दिए जाएं, तो यह एक प्रभावी रणनीतिक हथियार बन सकता है।

कामिकाज़े ड्रोन में अत्याधुनिक कैमरे लगे होते हैं, जिससे इसे ऑपरेट करने वाला व्यक्ति दुश्मन की हर गतिविधि को बारीकी से देख सकता है। यह ड्रोन अपने लक्ष्य का पीछा भी कर सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो जाता है कि लक्ष्य किसी भी स्थिति में बच न सके। भारत इस तकनीक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से भी लैस कर रहा है, जिससे यह और अधिक उन्नत और प्रभावी बन सके।

हालांकि, भारत के लिए इस क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत को कम करना है। वर्तमान में, भारत के स्वदेशी ड्रोन, इजरायल और ईरान के मॉडल्स की तुलना में सस्ते हैं, लेकिन अभी भी इनकी लागत ज्यादा है। सरकार इस पर ध्यान दे रही है और भारतीय रक्षा उद्योग को इसे और अधिक किफायती और अत्याधुनिक बनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

भारत का मुख्य उद्देश्य अपनी रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भर बनना है। पहले, भारत अपनी सैन्य आवश्यकताओं का लगभग 70% आयात करता था, लेकिन अब यह आंकड़ा 65% तक कम हो गया है। 2023 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो कि पिछले एक दशक की तुलना में 174% की वृद्धि को दर्शाता है।

ड्रोन तकनीक में भारत का निवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमा पर इस प्रकार के ड्रोन तैनात करने से न केवल सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर भी रख सकेगा। चीन, रूस, अमेरिका और इजराइल जैसे देश बड़ी संख्या में इन ड्रोन को तैयार कर रहे हैं, और भारत को भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने की जरूरत है।

सरकार और रक्षा वैज्ञानिकों का मानना है कि कामिकाज़े ड्रोन आने वाले समय में युद्ध की रणनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं। यह सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक अहम हिस्सा बनने जा रहे हैं। भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह न केवल इन ड्रोन को विकसित करे, बल्कि इन्हें अपने बजट में फिट करने के लिए इनकी लागत को भी कम करे।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि भारत की रक्षा तकनीक लगातार मजबूत हो रही है और आने वाले वर्षों में स्वदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता बढ़ेगी। कामिकाज़े ड्रोन का निर्माण इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है, जिससे भारत न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर सकेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी अपनी जगह बना सकेगा।

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