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Dhirendra Shastri’s Hindu Sanatan Yatra: हिंदू समाज को एकजुट करना

NCIUncategorized4 months ago

 

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में छतरपुर से ओरछा तक 9 दिनों की हिंदू सनातन यात्रा का शुभारंभ किया है। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य समग्र हिंदू समाज को एकजुट करना और सनातन धर्म के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना है। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन उन्होंने इसे हिंदुओं के दर्द के सामने नगण्य बताया। उनका मानना है कि इस यात्रा से हिंदू समाज के दर्द को कम करने में सहायता मिलेगी।

पदयात्रा में बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हो रहे हैं, जो पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। इस यात्रा में साधु-संतों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी भाग ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित कई राजनेताओं ने यात्रा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह यात्रा व्यापक समर्थन प्राप्त कर रही है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि हिंदुओं के दर्द के आगे उनका व्यक्तिगत दर्द कुछ भी नहीं है, और वे इस यात्रा को सफल बनाने के लिए संकल्पित हैं।

यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को एकजुट करने का आह्वान किया है। उन्होंने जात-पात और भेदभाव को मिटाने पर जोर दिया, ताकि हिंदू समाज में एकता स्थापित हो सके। उनका मानना है कि हिंदू समाज की एकजुटता से देश में सामाजिक समरसता (harmony) और सांस्कृतिक धरोहर (heritage) की रक्षा संभव है। पदयात्रा के विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह यात्रा जन-जन में उत्साह और जागरूकता फैला रही है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिल रहा है। उनके अनुयायियों का मानना है कि यह यात्रा हिंदू समाज में नई ऊर्जा का संचार करेगी और सनातन धर्म के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं के दर्द के आगे उनका दर्द कुछ भी नहीं है, और वे इसलिए इस यात्रा पर निकले हैं कि हिंदुओं का दर्द कम हो जाए।

पदयात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन उन्होंने इसे हिंदुओं के दर्द के सामने नगण्य बताया। उनका मानना है कि इस यात्रा से हिंदू समाज के दर्द को कम करने में सहायता मिलेगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को एकजुट करने का आह्वान किया है। उन्होंने जात-पात और भेदभाव को मिटाने पर जोर दिया, ताकि हिंदू समाज में एकता स्थापित हो सके। उनका मानना है कि हिंदू समाज की एकजुटता से देश में सामाजिक समरसता (harmony) और सांस्कृतिक धरोहर (heritage) की रक्षा संभव है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिल रहा है। उनके अनुयायियों का मानना है कि यह यात्रा हिंदू समाज में नई ऊर्जा का संचार करेगी और सनातन धर्म के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं के दर्द के आगे उनका दर्द कुछ भी नहीं है, और वे इसलिए इस यात्रा पर निकले हैं कि हिंदुओं का दर्द कम हो जाए।

पदयात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन उन्होंने इसे हिंदुओं के दर्द के सामने नगण्य बताया। उनका मानना है कि इस यात्रा से हिंदू समाज के दर्द को कम करने में सहायता मिलेगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को एकजुट करने का आह्वान किया है। उन्होंने जात-पात और भेदभाव को मिटाने पर जोर दिया, ताकि हिंदू समाज में एकता स्थापित हो सके। उनका मानना है कि हिंदू समाज की एकजुटता से देश में सामाजिक समरसता (harmony) और सांस्कृतिक धरोहर (heritage) की रक्षा संभव है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिल रहा है। उनके अनुयायियों का मानना है कि यह यात्रा हिंदू समाज में नई ऊर्जा का संचार करेगी और सनातन धर्म के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं के दर्द के आगे उनका दर्द कुछ भी नहीं है, और वे इसलिए इस यात्रा पर निकले हैं कि हिंदुओं का दर्द कम हो जाए।

पदयात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन उन्होंने इसे हिंदुओं के दर्द के सामने नगण्य बताया। उनका मानना है कि इस यात्रा से हिंदू समाज के दर्द को कम करने में सहायता मिलेगी। यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को एकजुट करने का आह्वान किया है। उन्होंने जात-पात और भेदभाव को मिटाने पर जोर दिया, ताकि हिंदू समाज में एकता स्थापित हो सके। उनका मानना है कि हिंदू समाज की एकजुटता से देश में सामाजिक समरसता (harmony) और सांस्कृतिक धरोहर (heritage) की रक्षा संभव है।पंडित धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिल रहा है।

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