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UK Leaked Report: हिंदू और खालिस्तानी सबसे बड़े खतरे?

NCIvimarshRN2 months ago

UK Leaked Report 

 यूनाइटेड किंगडम (UK) की हाल ही में लीक हुई एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसमें बताया गया है कि UK के लिए सबसे बड़े ख़तरों में से दो नाम “खालिस्तानी उग्रवादी” और “हिंदू राष्ट्रवादी उग्रवादी” शामिल हैं। इस रिपोर्ट ने कई विवाद खड़े कर दिए हैं और इसकी सत्यता को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। यह रिपोर्ट UK होम ऑफिस द्वारा तैयार की गई थी, जिसे पॉलिसी एक्सचेंज नामक थिंक टैंक ने लीक किया। इस रिपोर्ट में नौ प्रकार की उग्रवादी विचारधाराओं की पहचान की गई है, जिन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़े खतरे के रूप में इस्लामिक उग्रवाद (Islamist Extremism) को बताया गया है। इसके बाद एक्सट्रीम राइट विंग (Right-Wing Extremism), मिसोजनी (Misogyny – महिलाओं के प्रति नफरत), खालिस्तानी समर्थक गुट, हिंदू राष्ट्रवादी उग्रवादी (Hindu Nationalist Extremists), पर्यावरणवादी उग्रवाद (Environmental Extremism), वामपंथी उग्रवादी (Left-Wing Extremism), अराजकतावादी (Anarchist Extremism), और सिंगल-इशू उग्रवाद (Single-Issue Extremism) को शामिल किया गया है। रिपोर्ट का कहना है कि ये सभी गुट अलग-अलग तरीकों से समाज में हिंसा और नफरत फैलाने का काम करते हैं।

खालिस्तानी उग्रवाद लंबे समय से भारत के लिए भी एक चिंता का विषय रहा है, क्योंकि यह विचारधारा पंजाब को भारत से अलग कर एक अलग राष्ट्र बनाने की मांग करती है। UK, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में खालिस्तानी समर्थक गुट सक्रिय हैं और वहां से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। हाल के वर्षों में खालिस्तानी समूहों पर हिंसा और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह सिर्फ एक वैचारिक आंदोलन नहीं बल्कि एक उग्रवादी समूह भी बन चुका है।

रिपोर्ट में हिंदू राष्ट्रवादियों को भी उग्रवाद की श्रेणी में रखा गया है, जो कि कई लोगों को आश्चर्यजनक लगा। इतिहास पर नजर डालें तो ब्रिटिश शासनकाल में भी हिंदू राष्ट्रवादियों को विद्रोही माना गया था, क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था। हालांकि, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ हिंदू राष्ट्रवादी संगठन UK में सांप्रदायिक तनाव फैलाने का काम कर रहे हैं और इन्हें उग्रवाद की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब 2022 में लीसेस्टर (Leicester) में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए थे, जिनमें दोनों समुदायों के बीच हिंसा देखने को मिली थी।

UK की सरकार इस रिपोर्ट को कितनी गंभीरता से लेगी, यह देखने की बात होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उग्रवाद को लेकर सरकार की नीतियां पुरानी पड़ चुकी हैं और इन्हें नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी बताया गया है कि कैसे सोशल मीडिया और विभिन्न कट्टरपंथी समूहों द्वारा युवाओं को भड़काने का काम किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि कई बार सांप्रदायिक दंगों के पीछे सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहें होती हैं, जिनकी वजह से माहौल बिगड़ता है। लीसेस्टर दंगों में भी सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई गलत जानकारी का बड़ा हाथ था।

रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि कुछ संगठन उग्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए धर्म और संस्कृति का इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे वह इस्लामिक उग्रवाद हो, खालिस्तानी विचारधारा हो, हिंदू राष्ट्रवाद हो या अन्य कोई विचारधारा, अगर उसमें हिंसा और नफरत को बढ़ावा दिया जाता है तो उसे उग्रवाद की श्रेणी में रखा जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या सिर्फ UK तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक मुद्दा बन चुकी है। कई देशों में अलग-अलग विचारधाराओं के नाम पर हिंसा और अराजकता फैलाने की कोशिश की जाती है। यह भी बताया गया है कि इन उग्रवादी गुटों को कहीं न कहीं विदेशी ताकतों का भी समर्थन मिलता है, जो उन्हें आर्थिक और वैचारिक सहायता प्रदान करते हैं।

इस रिपोर्ट के लीक होने के बाद इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। हिंदू संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई है और कहा है कि हिंदू राष्ट्रवाद को उग्रवाद की श्रेणी में रखना पूरी तरह से अनुचित है। वहीं, खालिस्तानी समर्थकों ने इसे एक “राजनीतिक चाल” करार दिया है।

UK सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को किस तरह से लागू करती है। अगर सरकार इस रिपोर्ट की सिफारिशों को मानती है तो इससे भारत और UK के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। खासकर भारत ने पहले भी कई बार खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि धार्मिक और वैचारिक उग्रवाद को किस हद तक बढ़ने दिया जा सकता है और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह न केवल UK बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा बन सकता है।

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