एक समय की बात है, एक सेठ जी थे जो बहुत कंजूस थे। वह किसी को एक रुपया तक नहीं देते थे। उनके घर में एक नौकर भी रहता था, जो धीरे-धीरे सेठ जी के स्वभाव को समझ चुका था। सेठ जी हर चीज को लेकर बहुत सोचते थे और कुछ भी आसानी से किसी को नहीं देते थे।
एक दिन सेठ जी ने खीर बनाई। अब सवाल यह था कि वह खीर खुद खाएं या नौकर को खिलाएं। उन्होंने दिमाग लगाया और एक योजना बनाई। उन्होंने नौकर से कहा, “हम इस कटोरी को फ्रिज में रख देते हैं और सो जाते हैं। सुबह जिसे सबसे अच्छा सपना आएगा, वह खीर खाएगा।” नौकर ने इस शर्त को मान लिया और दोनों सो गए।
सुबह हुई। सेठ जी पहले से ही सोच चुके थे कि उन्हें क्या सपना सुनाना है। उन्होंने नौकर से कहा, “बेटा, मैंने रात को सपना देखा कि मैं स्वर्ग चला गया। इंद्रदेव स्वयं मुझे लेने आए थे और स्वर्ग में मेरा भव्य स्वागत हुआ। फूलों की माला पहनाई गई, आरती उतारी गई और मुझे बहुत सम्मान मिला।” सेठ जी ने सोचा कि उन्होंने इतना अच्छा सपना सुनाया है कि अब खीर उन्हीं को मिलेगी।
इसके बाद नौकर की बारी आई। नौकर बोला, “सेठ जी, मैंने सपना देखा कि एक यमदूत आया। वह बहुत भयानक था – काले लंबे बाल, हाथ में बड़ा डंडा। उसने मुझसे कहा, ‘उठ, चल रसोई में।’ मैं डरते-डरते रसोई में गया, तो उसने कहा, ‘फ्रिज खोल और खीर खा।’ सेठ जी, डर के मारे मैंने तुरंत खीर निकालकर खा ली!”
सेठ जी यह सुनकर माथा पकड़कर बैठ गए और बोले, “अरे, तुझे खाना ही था तो मुझे भी बुला लेता!” नौकर ने हंसते हुए कहा, “आप तो स्वर्ग के आनंद ले रहे थे, आपको कैसे बुलाते?”
इस कहानी से एक बड़ी सीख मिलती है कि समय रहते अपनी पूंजी का सदुपयोग कर लेना चाहिए। अगर हम सिर्फ धन-संपत्ति जोड़ने में ही लगे रहेंगे और उसे सही कार्यों में खर्च नहीं करेंगे, तो अंत में वह दूसरों के हाथ में चली जाएगी। इसलिए जीवन में धन का सही उपयोग करना बहुत जरूरी है।