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Is Google Losing? OpenAI का नया AI धमाका!

NCIAIRN1 month ago

Is Google Losing?

 हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां OpenAI ने अपने नए “Deep Research” नामक AI मॉडल को पेश किया है। इस मॉडल की खासियत यह है कि यह गूगल सर्च की पारंपरिक प्रणाली से अलग काम करता है और एक नई तरह की जानकारी खोजने और प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है। यह तकनीक इतनी उन्नत है कि यह किसी विशेषज्ञ शोधकर्ता की तरह गहन अध्ययन कर सकती है और कुछ ही समय में विस्तार से रिपोर्ट तैयार कर सकती है। इसने Google जैसे सर्च इंजनों के लिए एक नई चुनौती पेश की है, क्योंकि अब लोग सिर्फ लिंक खोजने के बजाय सीधे सुव्यवस्थित और सटीक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

गूगल पिछले दो दशकों से इंटरनेट पर खोज का बादशाह बना हुआ था, लेकिन अब उसकी पकड़ कमजोर होती दिख रही है। हाल के वर्षों में गूगल सर्च की गुणवत्ता में गिरावट आई है। लोग जब किसी विषय पर खोज करते हैं, तो अक्सर SEO (Search Engine Optimization) से भरी वेबसाइटें सामने आती हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य उपयोगी जानकारी देने से अधिक ट्रैफिक प्राप्त करना होता है। इस वजह से लोग अब अपने सर्च क्वेरी के साथ “Reddit” या “Quora” जोड़कर वास्तविक और भरोसेमंद उत्तर खोजने लगे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि यूजर्स अब गूगल सर्च पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते।

गूगल ने इस समस्या से निपटने के लिए AI-संचालित सर्च फीचर पेश किए हैं, लेकिन ये भी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हुए हैं। हाल ही में एक उदाहरण सामने आया, जहां गूगल के AI ने सुझाव दिया कि लोग पत्थर खा सकते हैं, जो एक खतरनाक और हास्यास्पद गलती थी। इस तरह की गलतियां दिखाती हैं कि गूगल का AI-संचालित सर्च अभी पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं हुआ है। इसके विपरीत, OpenAI का “Deep Research” सिस्टम अधिक सुव्यवस्थित और सटीक जानकारियां प्रदान करता है। यह AI केवल लिंक दिखाने की बजाय, पूरे विषय का गहन अध्ययन करता है और उपयोगकर्ता को एक विस्तृत रिपोर्ट के रूप में जानकारी प्रदान करता है।

“Deep Research” की सबसे बड़ी खासियत इसकी ट्रांसपेरेंसी (transparency) है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि उसने जानकारी कहां से प्राप्त की है, जबकि गूगल के सर्च परिणाम अक्सर एडवर्टाइजिंग (advertising) और SEO आधारित एल्गोरिदम (algorithm) पर निर्भर होते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि गूगल का सर्च रिजल्ट प्रायः उन वेबसाइटों को प्राथमिकता देता है, जो बेहतर तरीके से अपनी रैंकिंग को ऑप्टिमाइज़ (optimize) करती हैं, बजाय उन साइट्स के जो वास्तव में उपयोगी और सटीक जानकारी प्रदान करती हैं।

“Deep Research” एक एडवांस (advanced) मॉडल का उपयोग करता है, जिसे “03 Reasoner” कहा जाता है। यह AI पारंपरिक चैटबॉट्स की तरह केवल शब्दों के आधार पर जवाब नहीं देता, बल्कि पहले पूरी जानकारी का विश्लेषण करता है और फिर एक संगठित जवाब तैयार करता है। यह किसी भी टॉपिक पर गहराई से अध्ययन कर सकता है और विभिन्न स्रोतों से जानकारी लेकर उसे एक रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत कर सकता है। इसके अलावा, यह टेक्स्ट, इमेज, पीडीएफ (PDF), स्प्रेडशीट और अन्य डेटा फॉर्मेट को भी प्रोसेस कर सकता है, जो इसे गूगल से ज्यादा सक्षम बनाता है।

इस AI का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह किसी भी जानकारी को प्रोसेस करने के दौरान यदि कोई गलती पाता है तो उसे सुधारने की क्षमता भी रखता है। दूसरी ओर, गूगल सर्च में यह क्षमता नहीं होती, क्योंकि वहां केवल लिंक दिए जाते हैं, जिन पर क्लिक करके उपयोगकर्ता को खुद सही जानकारी ढूंढनी होती है। इसके अलावा, “Deep Research” पूरी तरह से ऐड-फ्री (ad-free) है, जबकि गूगल का पूरा बिजनेस मॉडल विज्ञापन पर आधारित है। यदि AI आधारित सर्च इंजन अधिक लोकप्रिय हो जाते हैं, तो गूगल का राजस्व मॉडल पूरी तरह से बदल सकता है और यह कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

OpenAI ने “Deep Research” को फिलहाल केवल प्रोफेशनल यूज़र्स (professional users) के लिए उपलब्ध कराया है, जिसकी कीमत $200 प्रति माह है। इसका मुख्य लक्ष्य शोधकर्ता (researchers), विश्लेषक (analysts) और बिजनेस प्रोफेशनल्स (business professionals) हैं, जो गहराई से अध्ययन करने के लिए सटीक और सुव्यवस्थित जानकारी चाहते हैं। लेकिन अगर OpenAI भविष्य में इसे मुफ्त उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध कराता है, तो यह गूगल के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। क्योंकि अधिकतर लोग गूगल का उपयोग इसलिए करते हैं क्योंकि यह मुफ्त और सुविधाजनक है। अगर “Deep Research” को मुफ्त उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है, तो यह गूगल के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

इस चुनौती का सामना करने के लिए गूगल के पास कुछ संभावित विकल्प हैं। पहला, वह AI स्टार्टअप्स (startups) का अधिग्रहण कर सकता है, जैसा कि उसने पहले “DeepMind” और अन्य कंपनियों के साथ किया है। दूसरा, वह अपने AI-संचालित सर्च एल्गोरिदम को और अधिक सटीक बना सकता है, ताकि उपयोगकर्ताओं को अधिक भरोसेमंद और सटीक जानकारी प्राप्त हो। तीसरा, वह SEO स्पैम को नियंत्रित करने के लिए अपने सर्च इंजन में बड़े सुधार कर सकता है। लेकिन समय तेजी से बदल रहा है और अगर गूगल जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाता, तो उसे अपनी पकड़ ढीली होती दिख सकती है।

इस बीच, अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियां भी AI सर्च इंजन विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) पहले ही “Bing” को AI-आधारित बना चुका है और वह OpenAI के साथ मिलकर इसे और अधिक उन्नत बना सकता है। इसके अलावा, Apple भी OpenAI के साथ बातचीत कर रहा है ताकि वह अपने “Siri” और “Spotlight Search” में “Deep Research” जैसी तकनीक को जोड़ सके। अगर Apple इस तकनीक को अपनाता है, तो गूगल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि Apple के पास मोबाइल सर्च मार्केट का एक बड़ा हिस्सा है।

आने वाले समय में तीन मुख्य संभावनाएं बन सकती हैं। पहला, गूगल अपने AI सर्च को तेजी से विकसित करेगा और अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगा। दूसरा, OpenAI “Deep Research” को अधिक उपयोगकर्ताओं के लिए खोल सकता है, जिससे ऑनलाइन जानकारी खोजने के तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। तीसरा, Apple अगर OpenAI के AI को अपने सर्च सिस्टम में एकीकृत कर देता है, तो यह गूगल के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।

हालांकि, गूगल अभी भी एक बहुत बड़ी कंपनी है, जिसके पास अत्याधुनिक AI रिसर्च, संसाधन और एक मजबूत बाजार स्थिति है। लेकिन एक बात निश्चित है – सर्च इंजन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है और यह बदलाव आने वाले वर्षों में इंटरनेट पर जानकारी तक पहुंचने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है।

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