लेखक- धीरज जी पराशर (पंडित, उज्जैन) via NCI
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में हजारों योगों का वर्णन मिलता है, लेकिन गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) को सबसे प्रभावशाली और शुभ राजयोगों में से एक माना गया है। ‘गज’ का अर्थ होता है हाथी और ‘केसरी’ का अर्थ होता है शेर। जिस प्रकार हाथी अपनी अपार शक्ति और सौम्यता के लिए जाना जाता है और शेर अपने साहस और नेतृत्व के लिए जंगल पर राज करता है, ठीक उसी प्रकार जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है, वह अपने जीवन में अपार शक्ति, बुद्धि और समाज में एक अलग मुकाम हासिल करता है। यह योग मुख्य रूप से देवगुरु बृहस्पति और मन के कारक चंद्रमा के शुभ संयोग से बनता है। ज्योतिष के अनुसार, यह योग व्यक्ति को न केवल धन-संपत्ति प्रदान करता है, बल्कि उसे असीम ज्ञान, मानसिक शांति और समाज में प्रतिष्ठा भी दिलाता है।
गजकेसरी योग कैसे बनता है? (Gaja Kesari Yoga Formation)
कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण तब होता है जब बृहस्पति (गुरु) और चंद्रमा का आपस में एक विशेष संबंध बनता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब चंद्रमा से बृहस्पति केंद्र भाव में स्थित होता है, तो इस शुभ योग का निर्माण होता है। केंद्र भाव का मतलब है कुंडली का पहला (लग्न), चौथा, सातवां और दसवां घर। सरल शब्दों में कहें तो, यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति एक साथ किसी केंद्र भाव में बैठे हों, या फिर चंद्रमा से गिनने पर बृहस्पति चौथे, सातवें या दसवें घर में मौजूद हो, तो आपकी कुंडली में गजकेसरी योग है। इसके अलावा, अगर शुभ ग्रहों की दृष्टि इन पर पड़ रही हो, तो यह योग और भी अधिक शक्तिशाली हो जाता है। यह योग जीवन में स्थिरता का सूचक है क्योंकि गुरु विस्तार का ग्रह है और चंद्रमा मन का, जब ये दोनों मिलते हैं तो व्यक्ति के जीवन की दिशा सकारात्मक रूप से बदल जाती है।
इस योग में ग्रहों की भूमिका
गजकेसरी योग को समझने के लिए हमें इसमें शामिल दो मुख्य ग्रहों—बृहस्पति और चंद्रमा—की भूमिका को गहराई से समझना होगा। बृहस्पति (Jupiter) को देवताओं का गुरु माना जाता है; यह ज्ञान, धन, उच्च शिक्षा, आध्यात्मिकता, नैतिकता और जीवन में विस्तार का कारक है। गुरु की कृपा के बिना जीवन में कोई भी बड़ी सफलता या सम्मान मिलना कठिन होता है। वहीं दूसरी ओर, चंद्रमा (Moon) हमारे मन, भावनाओं, मानसिक शांति, माता और जीवन के सुखों का प्रतिनिधित्व करता है। जब ज्ञान (गुरु) और मन (चंद्रमा) का मिलन होता है, तो व्यक्ति का मन भटकता नहीं है। गुरु का ज्ञान मन को सही दिशा देता है, जिससे व्यक्ति भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है और जीवन में सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।
गजकेसरी योग के अद्भुत लाभ (Benefits of Gaja Kesari Yoga)
जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग प्रबल अवस्था में होता है, उसे जीवन में कई तरह के सुखद परिणाम मिलते हैं। सबसे पहले, यह धन और समृद्धि का बड़ा कारक है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में आर्थिक तंगी का सामना बहुत कम करना पड़ता है और वे अपनी बुद्धि के बल पर संपत्ति अर्जित करते हैं। दूसरा सबसे बड़ा लाभ ज्ञान और बुद्धि है; ऐसे लोग समाज में अपनी विद्वता और समझदारी के लिए जाने जाते हैं। वे शिक्षा, सलाहकार या लेखन के क्षेत्र में बहुत नाम कमाते हैं। इसके अलावा, सम्मान और प्रतिष्ठा इस योग की एक बड़ी पहचान है। व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता जन्मजात होती है और लोग उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं। मानसिक शांति के लिहाज से भी यह योग बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि गुरु की दृष्टि चंद्रमा (मन) को दूषित होने से बचाती है, जिससे व्यक्ति तनाव मुक्त और खुश रहता है।
कब यह योग सबसे ज्यादा शक्तिशाली होता है?
केवल कुंडली में गुरु और चंद्रमा का केंद्र में होना ही काफी नहीं है, बल्कि इस योग के पूर्ण फल के लिए कुछ शर्तों का होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गजकेसरी योग तब सबसे ज्यादा फलदायी होता है जब गुरु और चंद्रमा दोनों ही ग्रह ‘बक’ (Strong) हों। यदि ये ग्रह अपनी उच्च राशि में हों (जैसे चंद्रमा वृषभ में और गुरु कर्क में—हालांकि गुरु कर्क में उच्च का होता है, वहां विचारणीय है) या अपनी मित्र राशि में हों, तो परिणाम अद्भुत होते हैं। इसके विपरीत, यदि गुरु या चंद्रमा पर किसी पापी ग्रह (जैसे राहु, केतु या शनि) की दृष्टि पड़ रही हो, या वे ‘अस्त’ (Combust) हों, तो इस योग का प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए, एक निर्दोष और पाप प्रभाव से मुक्त गजकेसरी योग ही व्यक्ति को रंक से राजा बनाने की क्षमता रखता है।
संक्षेप में कहा जाए तो, गजकेसरी योग ईश्वरीय आशीर्वाद के समान है जो व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है। यह योग साबित करता है कि जब ज्ञान और मन का सही संतुलन होता है, तो सफलता आपके कदम चूमती है। हालांकि, ज्योतिष यह भी कहता है कि योग का होना एक संभावना है, लेकिन उसे फलीभूत करने के लिए ‘कर्म’ करना आवश्यक है। यदि आपकी कुंडली में यह योग है, तो आपको अपनी नैतिकता बनाए रखनी चाहिए और निरंतर ज्ञान अर्जित करते रहना चाहिए, इससे इस योग के शुभ फलों में और भी वृद्धि होती है।
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