Margashirsha Amavasya 2025: सनातन धर्म में मार्गशीर्ष अमावस्या अत्यंत पावन और पुण्यदायक दिन माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी श्रीमद्भगवद्गीता में मार्गशीर्ष महीने को श्रेष्ठ बताया है “महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं।” यही कारण है कि इस महीने की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष मास की अमावस्या न केवल पितरों की शांति के लिए मानी जाती है, बल्कि भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए भी विशिष्ट है। इस दिन धार्मिक विधि-विधान से पूजा करने और भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करने से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और पितृ दोष भी शांत होता है। आइए विस्तार से जानें मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, इस दिन किए जाने वाले उपाय और जुड़ी हुई धार्मिक मान्यताएं।
मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व
मार्गशीर्ष मास का अपना धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से खास महत्व है। हिंदू धर्म के ग्रंथों में मार्गशीर्ष महीने को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन देवता, मुनी, पितृगण और भगवान विष्णु की आराधना करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पुण्य कर्म करने, तर्पण करने, दान देने, और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितृ दोष को शांत करने का भी शुभ योग होता है, इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, और उनकी स्मृति में दान देने की परंपरा है।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मार्गशीर्ष माह की प्रशंसा
महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं मार्गशीर्ष महीने को श्रेष्ठ कहा। श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय में भगवान कृष्ण कहते हैं: “मैं ऋतुओं में वसंत हूँ और महीनों में मार्गशीर्ष हूँ।” इसका अर्थ है कि यह मास आध्यात्मिक उन्नति, ध्यान, साधना, और भक्ति के लिए अत्यंत उपयुक्त है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन नियमित पूजा, मंत्र जाप, और भक्ति कर्म करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन के कर्म सिर्फ लौकिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति में भी सहायक होते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति हेतु मार्गशीर्ष अमावस्या
हिंदू धर्म में पितृ दोष को जीवन में परेशानियों, अड़चनों, और कष्टों का कारण माना जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या का दिन पितृ दोष की शांति के लिए सबसे उपयुक्त है। इस दिन किया गया तर्पण, श्राद्ध, और पितरों का स्मरण उन्हें प्रसन्न करता है, जिससे जीवन में शुभता, सुख-शांति और समृद्धि आती है। कई श्रद्धालु इस दिन तर्पण, जलदान, अनदान, और स्वयं के पूर्वजों के नाम से गरीबों, ब्राह्मणों, या जरूरतमंदों को दान देते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा का अपना महत्व है। माना जाता है कि श्रीहरि विष्णु की आराधना और उनके पवित्र 108 नामों के जाप से लोगों के जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं। यह नाम भगवान विष्णु के विभिन्न अवतार, गुण, ऐश्वर्य, और दिव्य स्वरूपों का वर्णन करते हैं। इस दिन प्रात: स्नान करके ध्यानपूर्वक विष्णु भगवान के चित्र के सामने उपासना करें और उनके 108 नामों का श्रद्धाभाव से जाप करें। ऐसा करने से न सिर्फ पितृ दोष शांत होता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि, और सभी तरह की विपत्तियाँ दूर होती हैं।
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पूजा करने की विधि
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन प्रात: स्नान करके स्थिर और शांत मन से भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा तस्वीर के सामने दीप जलाकर बैठें। भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, पीला चंदन और पीला वस्त्र अर्पित करें। पंचामृत या फल व मिष्ठान्न का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करें। जाप के बाद भगवान से अपने जीवन की समस्त कठिनाइयों और पितृ दोष के निवारण की प्रार्थना करें। पूजा के उपरांत गरीबों को दान दें और पितरों के नाम से तर्पण करें। पारंपरिक रूप से इस दिन गंगा स्नान, तिल दान, अन्न दान और जलदान का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान संभव न हो तो घर में ही स्नान करके गंगाजल मिश्रित पानी से अभिषेक करें। ब्राह्मण या साधुजन को भोजन कराने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है। घर में भगवान विष्णु की कथा, विष्णु सहस्रनाम पाठ, भगवद्गीता का पाठ, और धार्मिक चर्चा भी उत्तम मानी जाती है।
मार्गशीर्ष अमावस्या के अन्य धार्मिक उपाय
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पितरों की शांति के लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए।
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गरीबी दूर करने के लिए भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का पूजन करें।
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जीवन से संकट हटाने के लिए विष्णु भगवान को तुलसी की माला अर्पित करें और तुलसी के पास दीपक जलाएं।
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मानसिक शांति के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या भगवान के 108 नाम जपें।
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पितृ दोष और घर-परिवार की शांति के लिए तिल-दान और जल-दान करें।
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संतान प्राप्ति, गृहस्थ सुख और मार्ग में आने वाली बाधाएँ दूर करने के लिए मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा में भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण और धन-धान्य से जुड़ी चीजों का दान करें।
अमावस्या के दिन तर्पण, दान और पूजा का महत्व
अमावस्या को पितृ पक्ष की दृष्टि से काफी शुभ तिथि माना जाता है। हिंदू धर्म में प्रत्येक अमावस्या का दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए तर्पण, दान, श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन, कपड़े, अन्न और तिल का दान करने का श्रेष्ठ योग है। ऐसा कहा जाता है कि मार्गशीर्ष अमावस्या के तर्पण, श्राद्ध, और दान से पितरों को तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होकर घर-परिवार को आशीर्वाद देते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या पर श्राद्ध या तर्पण करने के लिए जल, तिल, कुश, पुष्प आदि का इस्तेमाल विशेषरूप से करना चाहिए। पुराणों, शास्त्रों और अन्य धर्मग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन किया गया दान और पूजा कई बार अधिक फलदायी होता है। इस दिन पितृ दोष की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, और विशेष पूजा विद्वानों द्वारा घर में करवाई जाती है। वास्तव में मार्गशीर्ष मास को श्रीकृष्ण का माह कहा गया है और इसकी अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होते हुए भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी श्रेष्ठ है। कई ग्रंथों में उल्लेख है कि मार्गशीर्ष अमावस्या पर दान करने से सौ गुना बढ़कर फल मिलता है। इस दिन पीतल की वस्तुएं, तिल, अन्न, जल, कुषा, गुड़, कपड़े, और फल दान करना शुभ माना जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना और भगवान विष्णु के नामों का जप करने से मन की शुद्धता, आत्मिक संतोष, सुख-शांति, संपन्नता, और जीवन के सभी दुखों से मुक्ति प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु के नामों का जाप करते समय हर नाम के अर्थ और भाव को समझने की कोशिश करें। इससे मन, वचन और कर्म – तीनों की शुद्धि होती है। शांत मन से की गयी उपासना, समर्पण और भावनात्मक भक्ति से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
कुल मिलाकर मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक स्तर पर भी है। यह दिन पितरों की शांति, भगवान विष्णु की कृपा, और जीवन के कष्टों की मुक्ति का परम सुयोग मान जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या पर किया गया ध्यान, जाप, तर्पण, और दान से न केवल पूर्वज संतुष्ट होते हैं, बल्कि भगवान श्रीहरि विष्णु के 108 नामों के जाप से जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति आती है। इस दिन उचित विधि-विधान से विधिपूर्वक भगवान विष्णु की उपासना, उनके 108 नामों का जाप, पितरों के लिए तर्पण, और जरूरतमंदों को दान करने से सभी समस्याओं का समाधान होता है और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि एवं मंगल का वास होता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के पावन अवसर पर हर श्रद्धालु को यह पुण्यकर्म अवश्य करने चाहिए, जिससे जीवन में भूत, वर्तमान और भविष्य – तीनों का कल्याण सुनिश्चित हो सके।
Disclaimer: इस लेख में दिए गए उपाय, लाभ, सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। इन्हें अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। धार्मिक मान्यताओं, ग्रंथों, पंचांगों, ज्योतिषियों और प्रवचनों से संग्रहित जानकारी को पाठकों के कल्याण के लिए प्रस्तुत किया गया है। अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक रहें और विचारशील होकर धार्मिक कर्म करें।
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