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चीन की डिजिटल मुद्रा पर एक्सपायरी डेट, भारत पर असर?

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Photo of Digital Currency of China

क्या है डीसीईपी (DCEP)?

डीसीईपी यानी Digital Currency Electronic Payment चीन की डिजिटल युआन मुद्रा का नाम है। यह चीन की मुद्रा युआन का डिजिटल प्रकार है और यह देश की कानूनी मुद्रा के रूप में मान्य है। इसे केंद्रीय बैंक (central bank) जारी करता है और चीन की लेनदेन (liabilities) का हिस्सा है। 

डिजिटल युआन का उपयोग और वितरण

डीसीईपी डिजिटल वॉलेट (digital wallets) में रहता है जिसका एप्प चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा अधिकृत होता है। यह एप्प उपयोगकर्ताओं द्वारा डाउनलोड किया जा सकता है हालांकि इसके लिए औपचारिक पंजीकरण (formal registration) की आवश्यकता हो सकती है। 

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क्यों है इसकी समाप्ति तिथि (expiry date) की आवश्यकता?

डिजिटल युआन को प्रोग्राम किया जा सकता है ताकि इसकी समाप्ति तिथि निर्धारित की जा सके। इसका मतलब है कि अगर इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर उपयोग नहीं किया गया तो यह ख़त्म हो जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को इसे एक निश्चित तारीख तक खर्च करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। 

चीन की डिजिटल मुद्रा की विशेषताएं

  1. केंद्रीकृत नियंत्रण

डिजिटल युआन सार्वजनिक लेजर (public ledger) पर नहीं रहता है। इसे पूरी तरह से सरकारी अधिकारियों द्वारा केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया जाता है। 

  1. वित्तीय मध्यस्थता की आवश्यकता

यह पीयर-टू-पीयर मुद्रा (peer-to-peer currency) नहीं है बल्कि इसके उपयोग के लिए आधिकारिक वित्तीय मध्यस्थता (financial intermediation) की आवश्यकता होती है।

शेन्ज़ेन मामले का अध्ययन

डिजिटल युआन का परीक्षण

अक्टूबर 2020 में, चीन ने अपनी डिजिटल मुद्रा का परीक्षण करने वाला पहला देश बन गया था। शेन्ज़ेन सरकार ने एक लॉटरी के माध्यम से कुल 10 मिलियन युआन (लगभग 12.5 करोड़) की डिजिटल मुद्रा देने का प्रयोग किया। इस लॉटरी में लगभग 2 मिलियन लोगों ने आवेदन किया और 50,000 लोगों ने जीत हासिल की।

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विजेताओं को डिजिटल रेनमिनबी ऐप (digital Renminbi app) डाउनलोड करना था ताकि वे 200 डिजिटल युआन (₹2 331) के “लाल पैकेट” (red packet) प्राप्त कर सकें जिसे वे शेन्ज़ेन के लुओहू जिले के 3,000 से अधिक दुकानों पर खर्च कर सकते हैं। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य न केवल इस तकनीक का परीक्षण करना था बल्कि COVID-19 महामारी के बाद उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देना भी था। 

चीन के इस फैसले पर राय

चीन के इस फैसले पर मेरी राय विश्लेषणात्मक है जो नीचे दिए पहलुओं पर आधारित है:

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1. तकनीकी प्रगति: डिजिटल मुद्रा का विकास और उसका परीक्षण तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिखाता है कि चीन डिजिटल तकनीक में नंबर वन बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

2. आर्थिक नियंत्रण: डिजिटल मुद्रा के माध्यम से सरकार को मुद्रा के लेन-देन पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। यह आर्थिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बना सकता है लेकिन इसमें निजता और स्वतंत्रता के मुद्दे भी उठ सकते हैं।

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3. उपभोक्ता व्यवहार पर प्रभाव: डिजिटल मुद्रा की समाप्ति तिथि का उपयोग करना उपभोक्ताओं को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित कर सकता है जिससे आर्थिक गतिविधि में तेजी आ सकती है लेकिन यह उपभोक्ताओं पर अनावश्यक का दबाव भी डाल सकता है।

4. वैश्विक प्रभाव: चीन का यह कदम अन्य देशों को भी डिजिटल मुद्रा की ओर अग्रसर कर सकता है। यह वैश्विक वित्तीय सिस्टम में बदलाव ला सकता है।

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5. निजता और सुरक्षा: डिजिटल मुद्रा की निगरानी और नियंत्रण क्षमता निजता के मुद्दों को उठा सकती है। यह उपभोक्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है।

इस तरह, यह फैसला तकनीकी प्रगति और आर्थिक नियंत्रण के बीच एक संतुलन की मांग करता है। यह तकनीक और निजता, आर्थिक प्रबंधन और उपभोक्ता स्वतंत्रता के बीच की बारीक रेखा खींच सकता है।

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भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता हैं 

यदि चीन अपने यहाँ डिजिटल मुद्रा (DCEP) लागू करता है, जिसमें पैसों की एक्सपायरी डेट होती है, तो भारत पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकते हैं:

1.आर्थिक प्रतिस्पर्धा: चीन की यह नीति उसे वैश्विक बाजार में एक प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान कर सकती है जिससे भारत को भी अपनी डिजिटल मुद्रा नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

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2. निति में प्रभाव: चीन की इस पहल का अनुसरण करते हुए भारतीय नीति निर्माता भी ऐसी डिजिटल मुद्रा नीतियों को विचार में लान पड़ सकता है जो आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करती हों।

3.व्यापार और निवेश पर प्रभाव: चीन की डिजिटल मुद्रा नीतियां वैश्विक व्यापार और निवेश पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं जिससे भारतीय बाजारों में भी परिवर्तन हो सकता है।

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Expiry Date of Digital Currency

Currency पर Expiry Date पर विचार करती महिला का चित्र

4. प्रौद्योगिकी और इनोवेशन में बदलाव: चीन की इस पहल से भारत में भी वित्तीय प्रौद्योगिकी और तकनीक के क्षेत्र में नए विकास करने की प्रेरणा मिल सकती है जिससे डिजिटल भुगतान प्रणालियों और बैंकिंग तकनीकों में में और सुधार हो सकता है।

5. वैश्विक वित्तीय बाजार पर प्रभाव: चीन की डिजिटल मुद्रा नीति का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है जिससे भारतीय वित्तीय बाजारों पर भी अप्रत्यक्ष(indirectly) प्रभाव पड़ेगा।

6. नीति और कानूनी परिवर्तन: चीन की इस पहल के परिणामस्वरूप भारत में भी डिजिटल मुद्रा से संबंधित नीतियों और कानूनी ढांचे में परिवर्तन आ सकता है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रहा जा सके।

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क्या होगा अगर भारत अपनी मुद्रा पर एक्सपायरी डेट (समाप्ति तिथि) रख लेता है?

यदि भारत चीन की तरह एक ऐसी डिजिटल मुद्रा प्रणाली अपनाता है जिसमें मुद्रा की समाप्ति तिथि हो तो इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

खर्च में वृद्धि: समाप्ति तिथि (एक्सपायरी डेट) के कारण उपभोक्ताओं को तय समय सीमा के भीतर धन खर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है जिससे आर्थिक प्रवाह तेज हो सकता है।

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मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: इससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है क्योंकि इससे सरकार मुद्रा की मात्रा को अधिक सटीकता से नियंत्रित कर सकती है।

डिजिटल आर्थिक व्यवस्था का विकास: इससे डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससेआर्थिक गतिविधियों और डिजिटलीकरण बढ़ेगा।

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निजता और सुरक्षा के मुद्दे: डेटा सुरक्षा और निजता की चिंताएँ बढ़ सकती हैं, खासकर जब उपभोक्ताओं के व्यय पैटर्न की निगरानी सरकार द्वारा की जाएगी।

सामाजिक और आर्थिक असमानताएं: इससे डिजिटल साक्षरता में कमी वाले वर्गों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

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लोगों की राय 

हमने आम जनता से उनके विचार पूछे जिसपर हम कुछ प्रतिक्रिया आपको बाटना चाहेंगे 

राहुल जो एक इंडस्ट्री में काम करते हैं कहते है “मुझे लगता है कि अगर भारत भी चीन की तरह अपनी मुद्रा पर समयसीमा लगाए तो इससे हमारे व्यापारिक व्यवहार पर अच्छा प्रभाव हो सकता है। यह हमें मुद्रा सुरक्षा और स्थिरता प्रदान कर सकता है।”

नेहा जो ब्यूटी पार्लर चलाती है ने कहा “मैं इस विचार के खिलाफ भी  हूँ और सहमत भी ।इस नियम से लोग अधिक मात्रा में पैसे खर्च करेंगे जिससे बिज़नेस को फायदा मिल सकता है लेकिन इससे पैसे बचाने में काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। “

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अमित जो एक व्यापारी हैं कहते हैं “मुझे लगता है कि समय सीमा लगाना एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इस पारिवारिक स्थिति और व्यापारिक माहौल को ध्यान में रखकर ही यह निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि सही ढंग से लागू किया जाए, तो इससे हमें लाभ हो सकता है और देखा जाए तो बिज़नेस मन के लिए तो ये फायदे मंद भी है पर हमें भी पैसे खर्च करने पड़ सकते है लेकिन फिर भी फायदेमंद ज्यादा है। “

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