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धर्म

भोले बाबा का पहला ज्योतिर्लिंग : जहाँ चन्द्रमा हुए श्राप मुक्त, कैसे पहुंचे सोमनाथ?

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित तीर्थस्थलों में से एक है। यह पवित्र शिवलिंग गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रभास पाटन नगर में स्थित है। सोमनाथ का अर्थ है ‘चंद्रमा का स्वामी’ और यह स्थान हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना जाता है।

सोमनाथ का इतिहास बहुत ही रोचक हैं। कहा जाता है कि चंद्रमा ने दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से विवाह किया था, लेकिन उन्होंने केवल रोहिणी को ही प्रेम किया। इस पर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को श्राप दिया, जिससे वे क्षीण होने लगे। श्राप के प्रभाव से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने शिव की आराधना की और प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें श्राप से मुक्ति दिलाई। इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा।

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सोमनाथ का मंदिर कई बार टुटा और इसे फिर बनाया गया । इसे बार-बार लूटा गया। इसकी वर्तमान संरचना का निर्माण 1951 में हुआ था और यह भारतीय वास्तुकला की शानदार मिसाल है। सोमनाथ मंदिर न केवल एक पवित्र तीर्थस्थल है बल्कि यह एक आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र भी है। यहां रोज हजारों भक्त आते हैं और अपनी आस्था और भक्ति के साथ भोले बाबा का पूजन करते हैं।

भोले के भक्तों के लिए महा शिवरात्रि सबसे प्रमुख है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा होती हैं। सोमनाथ मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक विशाल सभा मंडप है, जहां भक्त एकत्रित होते हैं। सोमनाथ मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। यहां विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिर की देखभाल और प्रबंधन का जिम्मा सोमनाथ ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट मंदिर की साफ-सफाई, रखरखाव और विकास कार्यों को देखता है। यह स्थान न केवल हिन्दुओं के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिकता की एक झलक देता है।

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सोमनाथ की यात्रा करना किसी भी भक्त के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। यहाँ की पवित्रता, शांति और शक्ति का अनुभव हर किसी को आंतरिक रूप से प्रेरित करता है। मंदिर की गरिमा और इसके पवित्र प्रांगण में व्याप्त दिव्यता हर आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहाँ के अद्भुत दृश्य, शिल्पकला और भक्ति का संगम निस्संदेह अद्वितीय है और मन को शांति देता है। यह मंदिर न केवल एक पवित्र स्थल है बल्कि एक जीवंत इतिहास की पाठशाला भी है जो आज भी अपनी समृद्धि और विरासत के साथ खड़ा है। इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व विश्व के कोने-कोने तक फैला हुआ है और यह विश्व धरोहर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। सोमनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए विभिन्न यातायात के साधन उपलब्ध हैं।

निम्नलिखित माध्यमों से पहुँचा जा सकता है:

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हवाई यात्रा: निकटतम हवाई अड्डा दीव है, जो सोमनाथ से लगभग 63 किलोमीटर दूर है। दीव हवाई अड्डे से आप टैक्सी या बस की सेवाएँ लेकर सोमनाथ तक पहुंच सकते हैं।

रेल यात्रा: सोमनाथ का अपना रेलवे स्टेशन है के साथ साथ वेरावल रेलवे स्टेशन से भी जुड़ा है जो भारत के मुख्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सोमनाथ या वेरावल रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद, आप स्थानीय ऑटो-रिक्शा या टैक्सी का उपयोग कर मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

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सड़क मार्ग: सोमनाथ गुजरात के मुख्य शहरों जैसे कि अहमदाबाद, राजकोट, और जामनगर से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। बस या कार से सोमनाथ तक पंहुचा जा सकता है। गुजरात राज्य परिवहन निगम (GSRTC) और निजी बस नियमित रूप से इन शहरों से सोमनाथ के लिए चलती हैं।

निजी वाहन: यदि आप निजी वाहन से यात्रा करना पसंद करते हैं, तो आप राजमार्गों के माध्यम से सोमनाथ तक ड्राइव कर सकते हैं। इससे आप रास्ते में आने वाले दर्शनीय स्थलों का आनंद भी आप उठा सकते हैं।

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आपकी सुविधा और यात्रा के अनुसार, आप इन विकल्पों में से किसी एक का चयन कर सोमनाथ की यात्रा कर सकते हैं। यदि आप अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति में रुचि रखते हैं तो सोमनाथ मंदिर की यात्रा आपके लिए अनिवार्य है। यहाँ आकर आप न केवल अपने भीतर की यात्रा कर सकते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति को भी जान सकते हैं।

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1 Comment

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