लेखक- बुनथु श्रीवास्तव via NCI
Gaj Kesari Yog : वैदिक ज्योतिष में हजारों योग होते हैं, लेकिन ‘गजकेसरी योग’ को सबसे शुभ और शक्तिशाली राजयोगों में से एक माना गया है। इसका नाम दो शब्दों से मिलकर बना है—’गज’ यानी हाथी और ‘केसरी’ यानी शेर। हाथी अपनी अपार ताकत, बुद्धि और गंभीरता के लिए जाना जाता है, जबकि शेर अपने साहस, फुर्ती और जंगल पर राज करने के लिए प्रसिद्ध है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) और चंद्रमा (Moon) एक साथ केंद्र में होते हैं, या एक-दूसरे से केंद्र (1, 4, 7, 10वें घर) में होते हैं, तो यह योग बनता है। जिस तरह जंगल में हाथी और शेर का मुकाबला कोई नहीं कर सकता, ठीक उसी तरह जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग मजबूत स्थिति में होता है, उसे अपने शत्रुओं और विरोधियों पर हमेशा विजय प्राप्त होती है। यह योग सिर्फ धन ही नहीं देता, बल्कि व्यक्ति को समाज में एक अलग पहचान और ऊँचा रुतबा भी दिलाता है। ऐसे लोग भीड़ में अपनी अलग चमक बिखेरते हैं और लोग उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुनते और मानते हैं।
ज्ञान और भावनाओं का अद्भुत संगम
इस योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘बुद्धि’ (गुरु) और ‘मन’ (चंद्रमा) का मिलन है। चंद्रमा हमारे मन की कोमलता और कल्पना है, और बृहस्पति ज्ञान, धर्म और विस्तार का कारक है। जब ये दोनों मिल जाते हैं, तो व्यक्ति का मन पवित्र और विचारों से भरा होता है। ऐसे लोगों के पास गजब की दूरदर्शिता होती है। वे भावनाओं में बहकर गलत फैसले नहीं लेते, बल्कि अपने ज्ञान का इस्तेमाल करके हर स्थिति को संभाल लेते हैं। गजकेसरी योग वाला व्यक्ति स्वभाव से बहुत उदार, धार्मिक और दानी होता है। वे शिक्षा, सलाहकार, राजनीति या प्रशासन के क्षेत्र में बहुत नाम कमाते हैं। उनके पास धन खुद चलकर आता है, उन्हें पैसों के पीछे भागना नहीं पड़ता। उनकी वाणी में एक ऐसा ओज होता है कि वे किसी को भी प्रभावित कर सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि ऐसे लोग अपने परिवार का नाम रोशन करते हैं और बुढ़ापे तक उनकी कीर्ति फैलती रहती है।
क्या आपकी कुंडली में भी यह योग काम नहीं कर रहा?
अक्सर लोग ज्योतिषियों के पास यह सवाल लेकर जाते हैं कि “मेरी कुंडली में तो गजकेसरी योग है, फिर भी मैं परेशान या गरीब क्यों हूँ?” यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि सिर्फ गुरु और चंद्रमा के साथ होने से ही राजयोग का फल नहीं मिलता। अगर कुंडली में बृहस्पति या चंद्रमा कमजोर हैं, अस्त हैं, या उन पर राहु-केतु जैसे पापी ग्रहों की बुरी नजर है, तो यह योग अपना पूरा फल नहीं दे पाता। इसे ऐसे समझें कि अगर शेर बीमार हो या हाथी जंजीरों में जकड़ा हो, तो वह अपनी ताकत नहीं दिखा पाएगा। कई बार यह योग होता तो है, लेकिन ‘केमद्रुम दोष’ के कारण उसका प्रभाव खत्म हो जाता है। इसलिए, खुश होने से पहले यह देखना जरूरी है कि ग्रहों की डिग्री (Bal) कितनी है और वे किस राशि में बैठे हैं। अगर यह योग सही स्थिति में है, तो रंक भी राजा बन सकता है, लेकिन अगर कमजोर है, तो व्यक्ति को सामान्य जीवन ही जीना पड़ता है।
योग को मजबूत बनाने के आसान उपाय
अगर आपकी कुंडली में यह योग है और आप इसका पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, या इसे और ज्यादा शक्तिशाली बनाना चाहते हैं, तो आपको अपने ‘गुरु’ को मजबूत करना होगा। सबसे सरल उपाय है अपने माता-पिता, गुरुजन और घर के बुजुर्गों का सम्मान करना, क्योंकि बृहस्पति ‘आशीर्वाद’ का ही दूसरा नाम है। गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का दान करना या माथे पर केसर का तिलक लगाना इस योग को बहुत बल देता है। चूंकि यह योग चंद्रमा से भी जुड़ा है, इसलिए भगवान शिव की आराधना करना सोने पर सुहागा जैसा काम करता है। कोशिश करें कि आप झूठ न बोलें और अपने चरित्र को साफ रखें, क्योंकि बृहस्पति ‘धर्म’ है; अगर आप अधर्म करेंगे तो यह राजयोग तुरंत निष्फल हो जाएगा। सोना (Gold) धारण करना भी इसके प्रभाव को बढ़ाने में मदद करता है।
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