लेखक- हरेन्द्र सिंह (गिनीज बुक रिकार्ड धारक) via NCI
Bade Ganesh Mandir Ujjain : बाबा महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) के कण-कण में देवत्व का वास है। यहाँ जब भक्त महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के अलौकिक दर्शन कर बाहर निकलते हैं, तो उनके कदम सहज ही एक और दिव्य धाम की ओर मुड़ जाते हैं, जो महाकाल मंदिर परिसर के बिल्कुल समीप ही स्थित है। यह प्रसिद्ध स्थान है ‘बड़ा गणेश मंदिर’। जैसा कि इसके नाम से ही आभास होता है, यह मंदिर प्रथम पूज्य देव भगवान गणेश के एक अत्यंत विशाल और विराट स्वरूप के लिए विश्व भर में विख्यात है। यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं है, बल्कि उज्जैन की समृद्ध धार्मिक परंपरा और वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत या उज्जैन की तीर्थ यात्रा को पूर्ण करने के लिए, विघ्नहर्ता के इस विशाल रूप का दर्शन और आशीर्वाद लेना अनिवार्य होता है। मंदिर का शांत वातावरण और गर्भग्रह की पवित्रता भक्तों को बरबस ही अपनी ओर खींच लाती है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता, जो इसे देश के अन्य गणेश मंदिरों से अलग बनाती है, वह है यहाँ स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा का आकार और उसकी निर्माण शैली। मंदिर में प्रवेश करते ही करीब 23-25 फीट ऊँची विशालकाय गणेश प्रतिमा के दर्शन होते हैं। इतनी विशाल प्रतिमा को देखकर भक्त आश्चर्य और श्रद्धा से भर जाते हैं। भगवान गणेश यहाँ एक बहुत ही सौम्य और वरद मुद्रा में विराजमान हैं, मानो अपने भक्तों के सारे संकटों को हरने के लिए तैयार हों।
बड़ा गणेश मंदिर की महत्ता केवल गणेश जी की विशाल प्रतिमा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मंदिर परिसर अपने आप में कई दुर्लभ मूर्तियों का खजाना समेटे हुए है। जैसा कि आपने उल्लेख किया, यहाँ भगवान हनुमान का एक अत्यंत प्रभावशाली ‘पंचमुखी’ स्वरूप स्थापित है। इस प्रतिमा में हनुमान जी के पाँच मुखों (वानर, नरसिंह, गरुड़, वराह और हयग्रीव/अश्व) के दर्शन होते हैं, जो तंत्र और शक्ति साधना की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, इस मंदिर में एक और ऐसा दुर्लभ विग्रह है जो शायद ही कहीं और देखने को मिले—वह है माता यशोदा की गोद में खेलते हुए बालकृष्ण की प्रतिमा। वात्सल्य रस से परिपूर्ण यह मूर्ति भक्तों का मन मोह लेती है। साथ ही, यहाँ नवग्रहों के राजा सूर्य देव और बाँकी के ग्रहों की भी प्रतिमा है। यहाँ नंदी जी के एक बड़ी प्रतिमा है जो ऐसा महसूस करती है की वो सही मे सामने खड़े है। नंदी जी के सामने है भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग और शिव परिवार, बहुत अद्भुत जीसे शब्दों मे नही बात सकते । इसके बाद आगे बढ़े तो माँ दुर्गा की श्याम रंग की प्रतिमा दिखती है , सिंह पे सवार माँ जगदंबा अपने भक्तों को आशीर्वाद देती नजर आ रही है । माँ के दर्शन करने के बाद जब आगे बढ़े तो समय के कुछ पुराने झलक लड्डू गोपाल के रूप मे नजर आते है, बहुत सी छोटी-छोटी मूर्तियाँ जिन्हे देख के एक अलग सा सुकून मिलता है जो आजकल के चीजों मे नहीं मिलता, कम शब्दों मे कहू तो सादगी और सुकून का संगम। इस प्रकार महाकाल मंदिर के पास स्थित यह बड़ा गणेश मंदिर, शैव, वैष्णव और शाक्त सभी परंपराओं का एक सुंदर संगम स्थल है।
Also Read- Jageshwar Dham : यहाँ से हुई शिवलिंग पूजा की शुरुआत!











