By- Dhanvansha Pandit via NCI
आज का पंचांग (Panchang) —“09 नवंबर 2025 का यह विस्तृत पंचांग दिनभर के शुभ-अशुभ समय, ग्रह-नक्षत्र और तिथि-विवरण का संपूर्ण मार्गदर्शन देता है। आज के सूर्योदय-सूर्यास्त से लेकर राहु काल और शुभ मुहूर्त तक—हर आवश्यक जानकारी यहाँ संकलित है।”
दिन-तारीख और स्थान
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दिन: रविवार
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तारीख: 09 नवंबर 2025
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स्थान: New Delhi, India
सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्र समय
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सूर्योदय: 06:39 AM
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सूर्यास्त: 05:30 PM
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चंद्रोदय (Moonrise): 09:07 PM
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चंद्रास्त (Moonset): 10:53 AM
तिथि, पक्ष, मास, संवत
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: पंचमी — 01:54 AM (10 Nov) तक; इसके बाद षष्ठी
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चांद्रमास: पौष्य/पूर्णिमांत पद्धति में — मार्गशीर्ष; अमान्त पद्धति में — कार्तिक
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विक्रम संवत: 2082 (Kalayukta)
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शक संवत: 1947 (Vishvavasu)
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गुजराती संवत: 2082 (Pingala)
नक्षत्र, योग, करण
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नक्षत्र: आर्द्रा — 08:04 PM तक; इसके बाद पुनर्वसु
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योग: सिद्ध — 03:02 PM तक; उसके बाद साध्य
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करण: कौलव — 03:05 PM तक; उसके बाद तैतिल — 01:54 AM (10 Nov) तक
राशि और पद
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चंद्र राशि (Moonsign): मिथुन
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सूर्य राशि (Sunsign): तुला
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सूर्य नक्षत्र: विशाखा
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नक्षत्र पद (आर्द्रा): क्रमशः प्रातः से दिन में बदलते हुए आर्द्रा के पाद और शाम के बाद पुनर्वसु के पाद
ऋतु, अयन, दिन-रात अवधि
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दृक ऋतु: हेमन्त (Prewinter)
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अयन: दक्षिणायन
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दिनमान (Dinamana): 10 घंटे 51 मिनट 28 सेकंड
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रात्रिमान (Ratrimana): 13 घंटे 09 मिनट 17 सेकंड
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
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ब्रह्म मुहूर्त: 04:54 AM – 05:46 AM
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प्रातः संध्या: 05:20 AM – 06:39 AM
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अभिजित मुहूर्त: 11:43 AM – 12:26 PM
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विजय मुहूर्त: 01:53 PM – 02:37 PM
अशुभ/निषिद्ध काल (Inauspicious Timings)
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राहु काल (रविवार): 04:09 PM – 05:30 PM
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यमगण्ड: 12:05 PM – 01:26 PM
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गुलिक काल: 02:48 PM – 04:09 PM
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दुर्मुहूर्त: 04:04 PM – 04:47 PM
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विदाल योग: 08:04 PM – 06:40 AM (10 Nov)
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बाण (Baana): राजा — 02:45 PM तक
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दिशा शूल: पश्चिम
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चंद्र वास: पश्चिम
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राहु वास: उत्तर
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निवास (Agnivasa/Patala): पाताल (नादिर) — 01:54 AM (10 Nov) तक
क्या करें/क्या टालें
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नए काम, मीटिंग, एग्रीमेंट की शुरुआत के लिए अभिजित (11:43–12:26) या विजय मुहूर्त (01:53–02:37) चुनें।
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राहु काल (04:09–05:30 PM), यमगण्ड (12:05–01:26 PM) और गुलिक (02:48–04:09 PM) में आरम्भ टालें।
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जप-ध्यान/उपासना के लिए ब्रह्म मुहूर्त उत्तम।
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शाम को नक्षत्र परिवर्तन (आर्द्रा→पुनर्वसु) के बाद के कुछ समय में कार्य-प्रकृति के अनुसार निर्णय लें—आर्द्रा में तीव्रता, पुनर्वसु में शांति/नवीनीकरण गुण प्रबल माने जाते हैं।






